चीनी की बढ़ती कीमतों पर सियासी घमासान, केजरीवाल ने इथेनॉल नीति पर उठाए सवाल

  • Post By Admin on Aug 21 2026
चीनी की बढ़ती कीमतों पर सियासी घमासान, केजरीवाल ने इथेनॉल नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चीनी की कीमतों में वृद्धि को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जिस गन्ने से चीनी का उत्पादन किया जाता था, उसका एक हिस्सा इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने के कारण घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उन्होंने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसके तहत इथेनॉल उत्पादन को विदेशी मुद्रा की बचत से जोड़कर देखा जाता है। केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने गन्ने से इथेनॉल तैयार कर विदेशी मुद्रा बचाने की बात कही, लेकिन अब चीनी की जरूरत पूरी करने के लिए विदेश से चीनी आयात करनी पड़ रही है। उन्होंने करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने से इथेनॉल उत्पादन किए जाने का दावा करते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाया। दरअसल, चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के अनुसार टैरिफ रेट कोटा के तहत यह आयात शून्य शुल्क पर किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखना है।

देश में कई जगह बढ़े चीनी के दाम

पिछले कुछ समय में कई शहरों में चीनी के खुदरा दाम बढ़े हैं। पश्चिम बंगाल के कुछ बाजारों में चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की बात सामने आई है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले एक महीने में कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, चीनी उद्योग संगठन इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने देश में चीनी की वास्तविक कमी होने से इनकार किया है। संगठन का कहना है कि नए चीनी सीजन के शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। ISMA के मुताबिक हालिया कीमत वृद्धि का एक कारण त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, बाजार में सट्टेबाजी और घबराहट में की जा रही खरीदारी भी हो सकती है। संगठन को उम्मीद है कि नए सीजन में गन्ने की पेराई सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले शुरू हो सकती है, जिससे घरेलू बाजार में नई चीनी जल्दी पहुंच सकेगी।

सरकार के फैसले को एहतियाती कदम बता रहा उद्योग

चीनी उद्योग का कहना है कि 10 लाख टन आयात की अनुमति को देश में चीनी की गंभीर कमी के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय इसे त्योहारी अवधि में अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के एहतियाती कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने बड़े थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा से जुड़े प्रावधान भी लागू किए हैं। इसके तहत अधिक मात्रा में चीनी की खपत करने वाले थोक खरीदारों को सीमित अवधि की खपत के अनुरूप ही स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है।

इथेनॉल को लेकर फिर गरमाई राजनीति

चीनी की कीमतों के बीच इथेनॉल उत्पादन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जहां सरकार इथेनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा, आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचत से जोड़ती रही है, वहीं विपक्षी नेताओं की ओर से इसके कारण चीनी उत्पादन और घरेलू उपलब्धता प्रभावित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों पर सरकार के आयात फैसले का कितना असर पड़ता है, इस पर बाजार और उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।