ब्रह्मपुत्र पर चीन की बड़ी चाल : सीमा के करीब चीन ने तेज किया मेगा डैम निर्माण
- Post By Admin on Jun 20 2026
नई दिल्ली : तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन द्वारा दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक बांध के निर्माण कार्य को गति दिए जाने के बाद भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत-चीन सीमा के निकट चल रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर सुरक्षा और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया सूचनाओं और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह संकेत मिले हैं कि हाल के महीनों में निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।
यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, जहां इसे सियांग नदी के नाम से जाना जाता है। आगे चलकर यही नदी असम में ब्रह्मपुत्र का रूप लेती है। इस नदी पर पूर्वोत्तर भारत के लाखों लोगों की आजीविका और जल संसाधन निर्भर हैं। सूत्रों के अनुसार भारत सरकार इस परियोजना पर लगातार नजर बनाए हुए है। इसे तिब्बत में चीन की सबसे महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। भारत लंबे समय से सीमापार नदियों पर बनने वाले बड़े बांधों के संभावित प्रभावों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े बांध के निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आ सकता है। इसके साथ ही गाद के प्रवाह, पारिस्थितिकी तंत्र और निचले क्षेत्रों के पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि इससे नदी के जल संसाधनों पर निर्भर क्षेत्रों को भविष्य में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस परियोजना का रणनीतिक पहलू भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी के ऊपरी हिस्से में विशाल बांध बनने से चीन को जल प्रवाह प्रबंधन में अतिरिक्त क्षमता प्राप्त हो सकती है, जिसे किसी भी तनावपूर्ण परिस्थिति में रणनीतिक लाभ के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि चीन का दावा है कि उसके हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट केवल बिजली उत्पादन के उद्देश्य से हैं और इससे निचले क्षेत्रों में स्थित देशों को कोई नुकसान नहीं होगा। इसके बावजूद भारत इस मामले में सतर्क रुख अपनाए हुए है और परियोजना के हर चरण की निगरानी कर रहा है। इससे पहले संसद में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा था कि सरकार ने प्रस्तावित मेगा डैम से संबंधित रिपोर्टों का संज्ञान लिया है और इस परियोजना से जुड़े सभी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया था कि भारत पिछले कई वर्षों से इस परियोजना की प्रगति और उसके संभावित प्रभावों का आकलन कर रहा है।