राफेल महाडील की ओर बढ़ता भारत, 94 लड़ाकू विमान देश में बनाने का प्रस्ताव
- Post By Admin on Aug 07 2026
नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी रक्षा डील पर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। फ्रांस की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत सरकार को 114 मल्टीरोल राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव सौंप दिया है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस संभावित डील को भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सौदे की सबसे बड़ी विशेषता ‘मेक इन इंडिया’ पहल से इसका जुड़ाव है। प्रस्ताव के तहत 114 विमानों में से 94 लड़ाकू विमान भारत में ही एक भारतीय साझेदार कंपनी के सहयोग से निर्मित किए जाने का प्रावधान है। रक्षा मंत्रालय और वायुसेना इस प्रस्ताव के तकनीकी तथा वित्तीय पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन कर रहे हैं। फ्रांस ने यह प्रस्ताव भारत द्वारा मई में भेजे गए ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ (एलओआर) के जवाब में दिया है। इसमें तकनीक हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) पर विशेष जोर दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार डसॉल्ट एविएशन के अलावा इंजन निर्माता सफरान, एवियोनिक्स कंपनी थेल्स और हथियार निर्माता एमबीडीए भी भारत को अपनी महत्वपूर्ण तकनीक उपलब्ध करा सकते हैं। इससे एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के क्षेत्र में 55 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का मार्ग प्रशस्त होने की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय पक्ष इस बात पर भी विशेष ध्यान दे रहा है कि नए राफेल विमानों में स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइलों और अन्य भारतीय हथियार प्रणालियों का एकीकरण सहज रूप से किया जा सके। वर्तमान में भारतीय वायुसेना राफेल के एफ3आर संस्करण का उपयोग कर रही है, जबकि नए प्रस्ताव में उन्नत एफ-4 और भविष्य के एफ-5 संस्करणों का संयोजन शामिल होने की संभावना है। प्रस्तावित विमानों में आधुनिक एईएसए रडार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, बेहतर सैटेलाइट लिंक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सहायता प्रणालियां शामिल हो सकती हैं। इन तकनीकों से वायुसेना की दूर तक निगरानी, लक्ष्य भेदन और आत्मरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 2015 के समझौते के तहत प्राप्त 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी अपने विमानवाहक पोतों के लिए 26 राफेल-एम विमानों का ऑर्डर दिया है। दूसरी ओर, पुराने मिग विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट और तेजस कार्यक्रम के उत्पादन में हो रही देरी के कारण वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या दबाव में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो इससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार होगा। साथ ही समान प्रकार के विमानों की संख्या बढ़ने से रखरखाव और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। अंबाला एयरबेस पर पहले से मौजूद राफेल की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा नए विमानों की त्वरित तैनाती में सहायक हो सकती है।
हालांकि यह सौदा अभी प्रस्ताव और मूल्यांकन के चरण में है, लेकिन रक्षा क्षेत्र में इसे भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाले संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है।