ईरान-अमेरिका तनाव ने बिगाड़ा बाजार का मूड, कच्चा तेल महंगा होते ही शेयर धड़ाम

  • Post By Admin on Sep 02 2026
ईरान-अमेरिका तनाव ने बिगाड़ा बाजार का मूड, कच्चा तेल महंगा होते ही शेयर धड़ाम

नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर बुधवार, 2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमत एक महीने से अधिक समय बाद पहली बार 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

सुबह करीब 9:24 बजे सेंसेक्स 760 अंक की गिरावट के साथ 76,183 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 232 अंक टूटकर 23,823 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 808 अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी ने 23,850 के महत्वपूर्ण स्तर को तोड़ते हुए 23,807 का निचला स्तर छुआ।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता

बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी सेना की ओर से ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद ईरान की तरफ से भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जॉर्डन के कैंप टिटिन स्थित अमेरिकी सैन्य बैरक पर हमले का दावा किया है। ईरानी सेना ने बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी बलों को निशाना बनाने की बात भी कही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ा दी है।

कच्चा तेल 97 डॉलर के करीब पहुंचा

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में तेज उछाल आया। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 5.91 प्रतिशत तक बढ़कर 96.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।

तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ने का दबाव बन सकता है। इसके अलावा महंगे कच्चे तेल का असर महंगाई और व्यापार संतुलन पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशक तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी को बाजार के लिए अहम जोखिम के तौर पर देख रहे हैं।

एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली

भारतीय बाजार के साथ बुधवार को एशिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई 2.90 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.08 प्रतिशत, शंघाई कंपोजिट 1.14 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 1.35 प्रतिशत नीचे रहा।

इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स में 0.8 प्रतिशत, एसएंडपी 500 में 0.71 प्रतिशत और नैस्डैक में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका में 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड भी सोमवार के 4.75 प्रतिशत से बढ़कर 4.79 प्रतिशत हो गई।

आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर रहेगी?

फिलहाल निवेशकों की निगाह अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका असर वैश्विक बाजारों के सेंटीमेंट पर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। ऐसे में बाजार को तनाव कम होने का फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। निवेशक अब आगे के घटनाक्रम और तेल की कीमतों की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं।