शांति के नाम पर सत्ता का खेल : ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस से मचा वैश्विक भूचाल
- Post By Admin on Jan 27 2026
वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क : संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बार उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक नए अंतरराष्ट्रीय मंच की घोषणा कर इसे अपना नया राजनीतिक दांव बताया है। इसे शांति स्थापना का मंच कहा जा रहा है, लेकिन आलोचक इसे ट्रंप की निजी महत्वाकांक्षाओं और वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति मान रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से खिन्न रहे हैं और उसी पृष्ठभूमि में उन्होंने इस नए मंच की परिकल्पना की है। इस क्लब से जुड़ने के लिए उन्होंने 65 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रण भेजा है, जिसमें सदस्यता शुल्क एक अरब डॉलर तय किया गया है। ट्रंप स्वयं इसके चेयरमैन होंगे। इसकी कार्यकारिणी में उनके दामाद जॉर्ड कुश्नर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर समेत कई प्रभावशाली राजनयिक और उद्योगपति शामिल हैं।
गाजा युद्ध के बाद बनी पृष्ठभूमि
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की नींव मध्य-पूर्व संकट से जुड़ी मानी जा रही है। अक्टूबर 2023 से जारी गाजा युद्ध के दौरान इस्राइली कार्रवाई से फलस्तीन में भारी तबाही हुई। अगस्त-सितंबर में ट्रंप और टोनी ब्लेयर ने गाजा के लिए प्रशासनिक और आर्थिक पुनर्निर्माण का एक खाका पेश किया, जिसे इस्राइल और हमास दोनों ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया। इसके बाद 12 अक्टूबर को जोर्डन में ब्लेयर और फलस्तीनी नेतृत्व के बीच बैठक हुई। उसी शाम ट्रंप ने गाजा युद्धविराम और ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन की घोषणा कर दी।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव संख्या 2803 के जरिए युद्धविराम का स्वागत किया। इसके अगले दिन मिस्र के शर्म-अल-शेख में बैठक हुई, जिसमें तकनीकी समितियों के गठन पर सहमति बनी। इसी क्रम में 14 जनवरी को ट्रंप ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों को इस मंच से जुड़ने का औपचारिक निमंत्रण भेजा।
संयुक्त राष्ट्र के समानांतर संगठन की आशंका
ट्रंप का दावा है कि यह मंच संकटग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना, वैध प्रशासन बहाली और स्थायित्व को बढ़ावा देगा। हालांकि, कई विशेषज्ञ इसे संयुक्त राष्ट्र के समानांतर एक निजी वैश्विक मंच के रूप में देख रहे हैं। इसकी कार्यकारिणी में ट्रंप के करीबी और विश्व राजनीति के चर्चित चेहरे शामिल हैं। इसके डायरेक्टर जनरल यूएन के पूर्व मध्य-पूर्व समन्वयक निकोलाई म्लादेनोव होंगे। अन्य सदस्यों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकोफ, जॉर्ड कुश्नर, टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के मार्क रोवान, राजनीतिक सलाहकार रॉबर्ट गैब्रिएल और वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजयपाल सिंह बंगा शामिल हैं।
अलग-अलग देशों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
ट्रंप के न्योते पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसमें शामिल होने की पुष्टि की है। अल्बानिया के प्रधानमंत्री एदी रामा ने इसे अपने देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़ा है। वहीं अजरबैजान ने इससे दूरी बना ली है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिससे नाराज ट्रंप ने फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर टैरिफ 200 प्रतिशत तक बढ़ा दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ केवल शांति का मंच नहीं, बल्कि ट्रंप की वैश्विक ताकत और प्रभाव को बढ़ाने का एक नया प्रयोग है। आने वाले दिनों में यह पहल दुनिया की राजनीति में किस दिशा में असर डालेगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
- डॉ. सुधीर सक्सेना