3000 घंटे की रात, कैसे जीते हैं लोग उस द्वीप पर, जहां इंसानों से ज्यादा भालू रहते हैं
- Post By Admin on Jan 25 2026
दुनिया में कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां जीवन हमारी कल्पना से बिल्कुल अलग चलता है। ऐसी ही एक जगह है नॉर्वे का सुदूर द्वीप लॉन्गइयरबायेन, जहां सूरज साल में करीब 3000 घंटे तक दिखाई ही नहीं देता। यहां नवंबर से शुरू होने वाली रात फरवरी तक चलती है और पूरे 120 दिनों तक लोग सूरज की एक किरण के लिए तरसते रहते हैं। इस दौरान सुबह और रात का कोई फर्क नहीं होता—चाहे घड़ी में 10 बजे हों या आधी रात के 2, आसमान हमेशा तारों और जादुई नॉर्दर्न लाइट्स से सजा रहता है।
कल्पना कीजिए, आप सुबह दफ्तर जाने के लिए निकलते हैं और बाहर घना अंधेरा पसरा होता है। लंच ब्रेक में भी वही अंधकार और शाम को घर लौटते समय भी वही सन्नाटा। जहां आम लोग एक दिन की बारिश या बादलों से उदास हो जाते हैं, वहीं लॉन्गइयरबायेन के करीब 2500 निवासी हर साल चार महीने इसी अंधेरे के साथ जीना सीख लेते हैं। विज्ञान की भाषा में इस अवस्था को ‘पोलर नाइट’ कहा जाता है। इस दौरान सूरज क्षितिज के नीचे ही रहता है और पूरा शहर कृत्रिम रोशनी पर निर्भर हो जाता है। यहां लोगों की दिनचर्या सूरज से नहीं, बल्कि घड़ी की सुइयों से तय होती है। शरीर को दिन का एहसास दिलाने के लिए लोग विटामिन-डी की गोलियां लेते हैं और विशेष लाइट थेरेपी लैंप का इस्तेमाल करते हैं, ताकि मानसिक और शारीरिक संतुलन बना रहे।
लंबे अंधेरे के कारण चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन यहां के लोग इससे निपटने का अपना तरीका जानते हैं। वे ‘कोसेलिग’ नाम की एक जीवनशैली अपनाते हैं, जो सुकून और अपनापन सिखाती है। घरों को मोमबत्तियों, गर्म कॉफी और ऊनी कंबलों से सजाया जाता है। अंधेरे को कोसने के बजाय लोग उसे उत्सव की तरह जीते हैं। हर शाम किसी न किसी के घर संगीत, बोर्ड गेम्स या कहानियों की महफिल सजती है। अकेलेपन से बचने के लिए सामूहिक भोज यानी कम्युनिटी डिनर यहां की खास पहचान है। इस द्वीप पर करीब 50 देशों के लोग रहते हैं, जो रिसर्च और माइनिंग से जुड़े हैं। इतनी विविधता के बावजूद यहां आपसी जुड़ाव बेहद मजबूत है। अंधेरे के महीनों में यहां की सोशल लाइफ और भी ज्यादा सक्रिय हो जाती है। लोग स्नोमोबाइल पर सवार होकर मीलों दूर बर्फीली वादियों में नॉर्दर्न लाइट्स देखने निकल पड़ते हैं। जो दृश्य दुनिया के लिए अजूबा है, वह यहां के लोगों के लिए रोजमर्रा की सैर है। इसी दौरान ‘पोलर जैज’ जैसे म्यूजिक फेस्टिवल्स भी आयोजित होते हैं, ताकि शहर का सन्नाटा संगीत से गूंजता रहे।
इस द्वीप की दिनचर्या का सबसे अनोखा पहलू है अंधेरे में सुरक्षा। यहां बाहर निकलते वक्त सिर्फ माइनस 30 डिग्री तक की कड़ाके की ठंड से ही नहीं, बल्कि पोलर भालुओं से भी सतर्क रहना पड़ता है। इस इलाके में इंसानों से ज्यादा भालू हैं और अंधेरे में वे और भी खतरनाक हो जाते हैं। इसलिए लोग हेडलाइट्स, रिफ्लेक्टिव जैकेट और कई बार सुरक्षा के लिए राइफल तक साथ रखते हैं। सड़कों पर अजनबियों का एक-दूसरे को ‘हेलो’ कहना आम है, क्योंकि यहां हर इंसान दूसरे का सहारा बनता है।
फरवरी के अंत में जब पहली बार सूरज की किरण इस द्वीप पर लौटती है, तो वह पल किसी त्योहार से कम नहीं होता। जैसे ही सूरज की रोशनी पुराने अस्पताल की सीढ़ियों पर पड़ती है, पूरा शहर वहां इकट्ठा होकर ‘सोलफेस्टुका’ मनाता है। यह नजारा भावुक कर देने वाला होता है और लोगों को याद दिलाता है कि चाहे अंधेरा कितना भी लंबा क्यों न हो, उजाला लौटकर जरूर आता है।
स्वालबार्ड की यह ‘काली रात’ सिखाती है कि खुशियां बाहरी हालात की मोहताज नहीं होतीं। जहां हम छोटी परेशानियों में घिर जाते हैं, वहीं इस द्वीप के लोग चार महीने के अंधेरे को एक-दूसरे के साथ, अपनापन और उत्सव के साथ जीकर जीत लेते हैं। यही वजह है कि यह द्वीप सिर्फ ‘डूम्सडे वॉल्ट’ के कारण नहीं, बल्कि उन जिंदगियों के कारण भी खास है, जिन्होंने प्रकृति की सबसे कठिन चुनौती को अपनी जीवनशैली बना लिया है।