​चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: बिहार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 पर पुनर्विचार की मांग

  • Post By Admin on Aug 18 2026
​चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: बिहार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 पर पुनर्विचार की मांग

पटना : बिहार में प्रस्तावित सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विभिन्न अभ्यर्थियों और छात्रहित से जुड़े लोगों की चिंताओं पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 17 अगस्त 2026 को जारी पत्र में उन्होंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में मेधावी अभ्यर्थियों, लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत शिक्षकों और बिहार के छात्रों के हितों का संतुलित एवं न्यायसंगत ध्यान रखा जाना चाहिए।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि बिहार में लंबे अंतराल के बाद सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति का अवसर आया है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया का उद्देश्य केवल रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को योग्य, अनुभवी और उत्कृष्ट शिक्षकों से मजबूत करना होना चाहिए।

इन बिंदुओं पर पुनर्विचार की मांग

चिराग पासवान ने प्रस्तावित नियमावली में कई बिंदुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई। उन्होंने मांग की कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू किया जाए और अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष की जाए।

उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति को स्थायी एवं नियमित करने तथा नियुक्ति प्रक्रिया में डोमिसाइल नीति लागू करने की भी मांग की। साथ ही बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता के हनन को रोकने की बात कही।

अतिथि शिक्षकों के सेवा सामंजन की मांग

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि नियमित सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से पहले बिहार के विश्वविद्यालयों में लगातार कई वर्षों से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा सामंजन पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए 65 वर्ष की आयु तक सेवा सामंजन किए जाने की मांग रखी।

चिराग पासवान ने पत्र में कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े निर्णयों में योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों के योगदान और छात्रों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रस्तावित नियमावली के विभिन्न प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।