महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल के संकेत, उद्धव गुट के सांसदों में टूट की अटकलें तेज

  • Post By Admin on Jun 17 2026
महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल के संकेत, उद्धव गुट के सांसदों में टूट की अटकलें तेज

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर संभावित टूट की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री रह चुके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट द्वारा विपक्षी खेमे के सांसदों और विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिशों की चर्चा जोरों पर है। राजनीतिक गलियारों में इस अभियान को अनौपचारिक रूप से "ऑपरेशन टाइगर" कहा जा रहा है।

राजनीतिक हलचल उस समय बढ़ गई जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई। नौ सांसदों वाली पार्टी में से केवल चार सांसद ही बैठक में पहुंचे। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित बगावत की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। सूत्रों के अनुसार शिंदे गुट का दावा है कि उद्धव ठाकरे के खेमे के छह सांसद अलग समूह बनाने की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर बाद में शिंदे गुट के लोकसभा दल में शामिल हो सकते हैं। संभावित रूप से जिन सांसदों के नाम चर्चा में हैं, उनमें परभणी के संजय जाधव, शिर्डी के भाऊसाहेब वाकचौरे, यवतमाल के संजय देशमुख, हिंगोली के नागेश पाटिल अष्टीकर, धाराशिव के ओमराजे निंबालकर तथा मुंबई उत्तर-पूर्व के संजय पाटिल शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे फिलहाल उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। यदि छह सांसद अलग होते हैं तो यह पार्टी के लोकसभा दल के दो-तिहाई हिस्से के बराबर होगा, जिससे उन्हें दल-बदल कानून के तहत राहत मिलने की संभावना बन सकती है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सक्रिय कर दिया है। संजय राउत और अरविंद सावंत को नाराज सांसदों से बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं ठाकरे स्वयं भी सांसदों से संपर्क साधने में जुटे हैं। इस बीच उद्धव गुट ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर एक पत्र भी सौंपा है। पत्र में मांग की गई है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को ही आधिकारिक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि पार्टी का कोई समूह अलग दावा करता है तो किसी निर्णय से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।संभावित टूट की खबरों के बीच राज्यसभा सांसद संजय राउत और लोकसभा सांसद अरविंद सावंत दिल्ली पहुंचे। संजय राउत ने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

दूसरी ओर शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि वे किसी को पार्टी में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं कर रहे हैं, लेकिन यदि कोई जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ता स्वेच्छा से उनके साथ आना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार यह राजनीतिक कवायद केवल सांसदों तक सीमित नहीं है। शिंदे गुट के कुछ नेताओं का दावा है कि उद्धव गुट के कई विधायक भी उनके संपर्क में हैं। यदि यह प्रयास सफल होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी समीकरणों और राष्ट्रीय स्तर पर संख्या बल मजबूत करने की रणनीति के तहत यह पूरा घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजरें आने वाले दिनों में संभावित राजनीतिक फैसलों और दलों की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।