परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक पर एनडीए की नजर, दो-तिहाई बहुमत जुटाने की तैयारी तेज
- Post By Admin on Jun 21 2026
नई दिल्ली : संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक हलकों में विपक्षी दलों में संभावित टूट और दल-बदल की अटकलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार महिला आरक्षण को लोकसभा और विधानसभा सीटों के नए परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या बल जुटाने को लेकर आश्वस्त नजर आ रही है। एक केंद्रीय मंत्री के हवाले से कहा गया है कि मॉनसून सत्र तक सरकार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की उम्मीद कर रही है। बताया जा रहा है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े दो अहम संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किए जाने का प्रस्ताव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा भविष्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में भी रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रही है।
वर्तमान में 540 प्रभावी सदस्य संख्या वाली लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए 360 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी, जबकि एनडीए के पास अभी 293 सांसदों का समर्थन है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुछ विपक्षी दलों के सांसदों के एनडीए के पक्ष में आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश में है। हालांकि इन संभावनाओं पर संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि नए परिसीमन से कई निर्वाचन क्षेत्रों का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है, जिससे विपक्षी दलों को नुकसान होने की आशंका है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन प्रक्रिया का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती रही है कि 1971 की जनगणना के बाद से आबादी में हुए व्यापक बदलाव के बावजूद लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि नहीं हुई है, ऐसे में परिसीमन और सीटों के पुनर्गठन की प्रक्रिया समय की आवश्यकता है। आगामी मॉनसून सत्र में इन प्रस्तावित विधेयकों और उन्हें लेकर सरकार एवं विपक्ष की रणनीति पर देशभर की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।