रोमानिया की मरीज को बिना सर्जरी मिला किडनी स्टोन से छुटकारा, डॉ. अरुण कुमार सिंह का उपचार बना सहारा
- Post By Admin on Aug 30 2025
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बेंगलुरु : जीवन में कभी-कभी दर्द इतना लम्बा और असहनीय हो जाता है कि व्यक्ति हर उम्मीद खो बैठता है। रोमानिया की 35 वर्षीय मिसेस अलेक्जेंडर भी ऐसी ही एक दर्दभरी कहानी की किरदार थीं। पिछले छह-सात वर्षों से वे किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रही थीं। डॉक्टरों के चक्कर, बार-बार के इलाज और असंख्य दवाइयों के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली। कई चिकित्सकों ने सर्जरी का सुझाव दिया, लेकिन ऑपरेशन को लेकर उनके मन में हमेशा भय और संकोच रहा।
थकी हुई और निराश अलेक्जेंडर ने इंटरनेट पर समाधान तलाशना शुरू किया। तभी उन्हें भारतीय होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. अरुण कुमार सिंह का नाम मिला—एक ऐसा नाम जो किडनी स्टोन के गैर-सर्जिकल इलाज के लिए देश-विदेश में जाना जाता है। बेंगलुरु और बिहार में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. सिंह के बारे में पढ़कर उनके मन में एक नई उम्मीद जगी और उन्होंने उनसे संपर्क किया।
डॉ. सिंह ने उनकी तकलीफ को गहराई से समझा और व्यक्तिगत उपचार योजना बनाई। जिसमें होमियोपैथिक दवाओं के साथ जीवनशैली और आहार संबंधी परामर्श का भी हिस्सा था। अगले चार महीनों तक अलेक्जेंडर ने पूरी निष्ठा से इस इलाज का पालन किया और समय से दवाओं का सेवन किया। नतीजा आश्चर्यजनक था—स्टोन धीरे-धीरे घुलने लगे पेशाब के जरिए टूट कर बाहर निकल गए। तकरीबन एक सेंटीमीटर तक के स्टोन के 15-16 टुकड़े उनके शरीर से निकले। वह तेज दर्द, जो सालों से उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था, पूरी तरह खत्म हो गया।
इलाज के अंत तक अलेक्जेंडर पूरी तरह से किडनी स्टोन से मुक्त हो चुकी थीं। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे और चेहरे पर वह सुकून, जो लंबे समय बाद लौटा था। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “यह मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं। डॉ. अरुण कुमार सिंह ने न सिर्फ मुझे सर्जरी से बचाया, बल्कि मुझे एक नई जिंदगी दी।”
डॉ. सिंह का मानना है कि हर मरीज की तकलीफ अलग होती है और इलाज भी उसी के मुताबिक होना चाहिए। उनकी विशेषज्ञता का आधार यही व्यक्तिगत देखभाल और होमियोपैथी की गहरी समझ है। वे अपने मरीजों के साथ केवल डॉक्टर की तरह नहीं, बल्कि एक संवेदनशील मार्गदर्शक की तरह खड़े रहते हैं। यही कारण है कि दुनिया भर से लोग उनसे संपर्क करते हैं।
मिसेस अलेक्जेंडर की कहानी सिर्फ एक मरीज की सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि अगर सही दिशा मिले तो वर्षों पुरानी जटिल बीमारियों से भी बिना सर्जरी छुटकारा पाया जा सकता है।