सुमाया ग्रुप पर ईडी का शिकंजा : फर्जी लेनदेन मामले में 35 करोड़ की संपत्ति जब्त
- Post By Admin on Jan 15 2026
मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में सुमाया ग्रुप और उसके सहयोगियों के खिलाफ शिकंजा कसते हुए करीब 35.22 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय द्वारा की गई है।
जब्त संपत्तियों में बैंक बैलेंस, डीमैट होल्डिंग्स, म्यूचुअल फंड जैसी चल संपत्तियों के साथ-साथ दो अचल संपत्तियां भी शामिल हैं। ईडी की यह जांच वर्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें सुमाया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, उसके प्रमोटरों और अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं पर 137 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि भविष्य के ‘नीड टू फीड प्रोग्राम’ में मुनाफे का झांसा देकर निवेशकों से यह रकम जुटाई गई।
फर्जी अनुबंध और नकली कारोबार का जाल
ईडी की जांच में सामने आया है कि सुमाया ग्रुप और उसके सहयोगियों ने फंड और ट्रेड फाइनेंसिंग हासिल करने के लिए हरियाणा सरकार का एक फर्जी अनुबंध तैयार किया। इसके जरिए गैर-मौजूद कारोबारी गतिविधियों को वास्तविक टर्नओवर के रूप में दर्शाया गया।
जांच के अनुसार, ग्रुप कंपनियों से जुटाए गए फंड को प्रमोटर उशिक गाला ने एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली और हरियाणा की फर्जी कृषि व्यापारी संस्थाओं को भेजा। इसका उद्देश्य नकली खरीद को वास्तविक दिखाना था। वास्तव में कोई कृषि उत्पाद खरीदा ही नहीं गया। बाद में यही राशि अन्य शेल कंपनियों के जरिए नकद और आरटीजीएस एंट्री के मिश्रण से उशिक गाला के पास वापस पहुंचाई गई।
5,000 करोड़ रुपए का सर्कुलर लेनदेन
ईडी ने खुलासा किया है कि सुमाया ग्रुप ने बड़े पैमाने पर फर्जी चालान और लॉरी रसीदें बनाकर करीब 5,000 करोड़ रुपए का सर्कुलर लेनदेन किया। इनमें से महज लगभग 10 प्रतिशत लेनदेन ही वास्तविक थे। चक्रीय लेनदेन के जरिए कई संस्थाओं का टर्नओवर कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया, जिससे सुमाया ग्रुप का टर्नओवर दो साल में 210 करोड़ रुपए से बढ़कर 6,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसका सीधा असर शेयर कीमतों पर पड़ा और निवेशकों को कंपनी की झूठी और भ्रामक तस्वीर दिखाई गई।
पहले भी हुई थीं छापेमारी और गिरफ्तारी
इससे पहले ईडी ने मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में 19 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जहां से 3.9 करोड़ रुपए की चल संपत्तियां जब्त की गईं। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत भी बरामद हुए थे। जांच के दौरान ईडी ने 17 नवंबर को सुमाया ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रमोटर उशिक गाला को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।
ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाती है। एजेंसी मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि सभी दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके और निवेशकों को न्याय दिलाया जा सके।