पुलवामा शहादत की 7वीं बरसी : वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि, परिजनों की आंखों से छलके आंसू

  • Post By Admin on Feb 14 2026
पुलवामा शहादत की 7वीं बरसी : वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि, परिजनों की आंखों से छलके आंसू

नई दिल्ली : पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर आज पूरा देश शहीद जवानों को नमन कर रहा है। 14 फरवरी 2019 को पुलवामा जिले में हुए भीषण आतंकी हमले में शहीद हुए 40 सीआरपीएफ जवानों की याद में देशभर में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। इस मौके पर शहीदों के परिवारों की आंखें एक बार फिर नम हो गईं, लेकिन उनके चेहरों पर अपने वीर सपूतों पर गर्व भी साफ झलकता रहा।

पंजाब के गुरदासपुर जिले के दीनानगर में सीआरपीएफ कांस्टेबल मनिंदर सिंह की शहादत की बरसी पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट हरप्रीत सिंह, कर्नल विश्वनाथ (25 एमएसी यूनिट) और लेफ्टिनेंट बी.एस. नेगी (3 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री) समेत कई गणमान्य लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद को नमन किया।

मनिंदर सिंह के भाई लखविश सिंह अत्री ने भावुक होकर उस दिन को याद करते हुए बताया कि जब जवान छुट्टी खत्म कर 14 फरवरी 2019 को ड्यूटी पर लौट रहे थे, तभी यह भयावह हमला हुआ। उन्होंने कहा, “मैंने भाई को फोन किया, लेकिन फोन बंद था। करीब आधे घंटे बाद पुष्टि हुई कि वह भी शहीद हो चुके हैं। दुख तो बहुत हुआ, लेकिन इस बात का गर्व भी है कि मेरे भाई ने देश के लिए जान कुर्बान की।”

शहीद के पिता सतपाल अत्री ने कहा कि सात साल बाद भी उन्हें लगता है कि बेटा दरवाजे से अंदर आएगा और गले लगा लेगा। उन्होंने बताया कि मनिंदर सिंह पढ़ाई में अव्वल था और अफसर बनने का सपना देखता था। इसी वजह से उसने शादी भी नहीं की और नौकरी के साथ पढ़ाई करता रहा।

मनिंदर सिंह की बहन शबनम अत्री ने कहा, “उनकी शहादत के बाद ऐसा लगा जैसे हमारी पूरी दुनिया उजड़ गई हो। वह पूरे परिवार का सहारा थे, उनके बिना जिंदगी बहुत कठिन हो गई है।”

इसी तरह श्री आनंदपुर साहिब के रौली गांव निवासी शहीद कुलविंदर सिंह को भी परिवारजनों ने नम आंखों से याद किया। उनकी स्मृति में गांव में प्रतिमा स्थापित की गई है। पिता दर्शन सिंह ने कहा, “वह मेरा इकलौता बेटा था। 14 फरवरी हमारे लिए काला दिन है, लेकिन हमें गर्व है कि उसने देश के लिए बलिदान दिया।”

मोगा में शहीद जयमल सिंह के परिवार ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। मां सुखजीत कौर ने रोते हुए कहा कि बेटे के बिना जीवन बहुत मुश्किल हो गया है। पत्नी ने मांग की कि जयमल सिंह जिस स्कूल में पढ़े थे, उसका नाम शहीद के नाम पर रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान को याद रख सकें।

पुलवामा हमले की सातवीं बरसी पर देश एक बार फिर यह संकल्प दोहरा रहा है कि शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा और उनकी कुर्बानी हमेशा राष्ट्र को प्रेरणा देती रहेगी।