संसद मार्च पर रोक, शिक्षा सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटे युवा
- Post By Admin on Jul 20 2026
नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही सोमवार को राजधानी दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन तेज हो गया। युवा नेतृत्व वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन के सैकड़ों समर्थक संसद मार्च के लिए एकत्र हुए, लेकिन दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी गई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शिक्षा व्यवस्था की खामियों, लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को संसद तक पहुंचाना चाहते हैं। संसद से कुछ किलोमीटर दूर प्रदर्शन स्थल पर दिनभर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव की आशंका भी बनी रही।
यह आंदोलन उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था, जब मई में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' से की थी। आंदोलनकारियों ने इसी टिप्पणी को विरोध के प्रतीक के रूप में अपनाते हुए सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया, जो बाद में सड़कों तक पहुंच गया। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल ले जाने की घटना के बाद आंदोलन को और अधिक समर्थन मिलने लगा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है और सरकार इस पर जवाबदेही तय करने में विफल रही है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों में दोषियों की जवाबदेही तय करना तथा ऐसे मामलों से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करना शामिल है। उनका कहना है कि केवल जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत सुधार आवश्यक हैं। सोनम वांगचुक ने कहा है कि वे अपनी लगभग तीन सप्ताह से जारी भूख हड़ताल तभी समाप्त करेंगे, जब सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई कथित विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करेगी या प्रदर्शनकारियों को संसद तक जाकर अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सांसद उनके मुद्दों को संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो वे अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
उधर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद के मानसून सत्र को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जा रहा है। यह आंदोलन अब केंद्र सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों के साथ-साथ कुछ सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और फिल्म जगत की कुछ हस्तियों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलनकारियों पर देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।