सुपर अल-नीनो का खतरा बढ़ा, भारत में कमजोर मानसून और सूखे की आशंका से डर का माहौल

  • Post By Admin on May 17 2026
सुपर अल-नीनो का खतरा बढ़ा, भारत में कमजोर मानसून और सूखे की आशंका से डर का माहौल

नई दिल्ली: सुपर अल-नीनो को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। अमेरिकी मौसम एजेंसी National Oceanic and Atmospheric Administration (NOAA) के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस साल मई से जुलाई के बीच सुपर अल-नीनो एक्टिव हो सकता है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में कमजोर मानसून, सूखा, हीटवेव और मौसमीय असंतुलन का खतरा बढ़ गया है।

नोआ के अनुसार, इस बार प्रशांत महासागर का तापमान मई महीने में सामान्य से करीब 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र में यह असामान्य गर्मी पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जहां सुपर अल-नीनो की संभावना 61 प्रतिशत मानी जा रही थी, वहीं अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख Mrutyunjay Mohapatra ने कहा है कि इसका सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ेगा। इससे देश में सूखे जैसी स्थिति और कृषि संकट की आशंका बढ़ सकती है।

क्या होता है अल-नीनो

अल-नीनो एक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण हवाओं के पैटर्न में बदलाव आता है और दुनिया भर में बारिश का संतुलन बिगड़ जाता है। कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ आती है तो कहीं लंबे सूखे और भीषण गर्मी की स्थिति बन जाती है। सरल शब्दों में समझें तो अल-नीनो एक्टिव होने पर प्रशांत महासागर से भारत की ओर आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे मानसून की बारिश प्रभावित होती है।

भारत पर क्या होगा असर

विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने और जल संकट बढ़ने का खतरा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को अगस्त-सितंबर के दौरान सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभागों में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है। हालांकि लद्दाख, राजस्थान के कुछ हिस्सों, तेलंगाना और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में इसका असर अपेाकृत कम रहने की संभावना है।

दुनिया भर में बढ़ेगा मौसमीय संकट

सुपर अल-नीनो का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सूखे और जंगलों में आग का खतरा बढ़ सकता है। वहीं मध्य प्रशांत क्षेत्र में समुद्र का तापमान बढ़ने से भारी बारिश और चक्रवात जैसी स्थितियां बन सकती हैं। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के मुताबिक दुनिया में कुल बारिश बढ़ने के बावजूद धरती और इकोसिस्टम अधिक सूखे होते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब बारिश पूरे साल समान रूप से नहीं हो रही, बल्कि कम समय में अत्यधिक तेज बारिश के रूप में हो रही है। इसके बाद लंबे समय तक सूखा पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में मिट्टी पर्याप्त पानी सोख नहीं पाती और पानी तेजी से बहकर या भाप बनकर खत्म हो जाता है।