10 हजार से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगेगी रोक, जाने क्या है सरकार की नई गाइडलाइन

  • Post By Admin on Apr 14 2026
10 हजार से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगेगी रोक, जाने क्या है सरकार की नई गाइडलाइन

नई दिल्ली : बढ़ते डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक एक अहम कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्रीय बैंक के हालिया विचार-विमर्श पत्र में प्रस्ताव रखा गया है कि ₹10,000 से अधिक के डिजिटल खाता-से-खाता लेनदेन पर एक घंटे की देरी लागू की जाए। इस प्रस्ताव को लेकर बैंकों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है, जहां सुरक्षा के लिहाज से इसे जरूरी माना जा रहा है, वहीं इसके तकनीकी और परिचालन प्रभावों को लेकर चिंता भी जताई जा रही है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों को नियंत्रित करना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ₹10,000 से अधिक के लेनदेन कुल धोखाधड़ी मामलों की संख्या का लगभग 45 प्रतिशत और कुल राशि का 98.5 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। पिछले पांच वर्षों में डिजिटल फ्रॉड की रकम करीब 41 गुना बढ़कर लगभग 23 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। ऐसे में एक घंटे की देरी लागू होने से प्रेषक को संदिग्ध लेनदेन को पहचान कर रद्द करने का समय मिल सकेगा।

हालांकि बैंकों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं ने इस प्रस्ताव के व्यावहारिक पक्ष को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सबसे बड़ी विशेषता त्वरित भुगतान है और इस प्रकार की देरी इसकी मूल अवधारणा के विपरीत हो सकती है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए प्रणाली में कुछ हद तक जानबूझकर विलंब आवश्यक हो सकता है।

वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 80 से 85 करोड़ यूपीआई लेनदेन हो रहे हैं। यदि इनमें से एक छोटे हिस्से को भी एक घंटे के लिए रोकना पड़ा, तो इसके लिए बड़े स्तर पर तकनीकी संरचना की आवश्यकता होगी। इसके तहत ‘स्विच स्तर’ पर बदलाव करने होंगे और डेटा भंडारण क्षमता को भी काफी बढ़ाना पड़ेगा।

जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का मुख्य भार यूपीआई स्विच प्रदाताओं पर पड़ेगा, जिससे बैंकों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। ऐसे में सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाना केंद्रीय बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है।