त्रिपक्षीय कूटनीति : चीन में पहली बार बहुपक्षीय मंच पर उतरेंगे किम जोंग-उन
- Post By Admin on Aug 31 2025

सियोल : उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन इस सप्ताह चीन में आयोजित बहुपक्षीय कूटनीतिक मंच पर पहली बार शिरकत करने जा रहे हैं। वे बीजिंग में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस अवसर पर उनकी मौजूदगी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संभावित त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
2011 में सत्ता संभालने के बाद यह किम की पहली बहुपक्षीय राजनयिक भागीदारी होगी। इससे पहले उनके दादा और उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग 1959 में बीजिंग की सैन्य परेड में शामिल हुए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीजिंग में पुतिन और शी जिनपिंग के साथ किम का एक साथ मंच साझा करना इस बात का संकेत है कि उत्तर कोरियाई नेता फिलहाल दक्षिण कोरिया या अमेरिका के साथ कूटनीतिक पहल में दिलचस्पी नहीं रखते। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में वाशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में उत्तर कोरिया के साथ संवाद फिर से शुरू करने की इच्छा जताई थी।
समाचार एजेंसी योनहाप की रिपोर्ट के अनुसार, किम और पुतिन ने पिछले वर्ष सैन्य सहयोग को गहराते हुए प्योंगयांग से यूक्रेन युद्ध में मदद के लिए सैनिक और हथियार भेजने का समझौता किया था। वहीं, रूसी मीडिया के मुताबिक 3 सितंबर को तियानमेन चौक पर होने वाली सैन्य परेड में किम, पुतिन और शी एक साथ उपस्थित रहेंगे। बताया जा रहा है कि परेड में किम शी जिनपिंग के बाईं ओर और पुतिन दाईं ओर बैठेंगे।
किम की बीजिंग यात्रा विशेष ट्रेन से लगभग 20 घंटे की हो सकती है। हालांकि, दक्षिण कोरियाई विश्लेषकों का मानना है कि वे अपनी ‘फॉरेस्ट ग्रीन ट्रेन’ का ही इस्तेमाल करेंगे, न कि ‘शम्मा-1’ विमान का।
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि किम का यह कदम रूस-यूक्रेन युद्ध की संभावित दिशा को देखते हुए चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने का प्रयास है। हाल के महीनों में उत्तर कोरिया ने मास्को से नजदीकी बढ़ाई है और उसे सैन्य एवं संसाधन सहयोग का अहम स्रोत माना है। इसके साथ ही, प्योंगयांग और बीजिंग ने भी हाल ही में द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के संकेत दिए हैं।
कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि किम की यह यात्रा अमेरिका के साथ संभावित वार्ता से पहले अपनी सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने का प्रयास हो सकती है।