नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ा, बिहार की नदियों पर भी बढ़ा दबाव

  • Post By Admin on Sep 26 2026
नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ा, बिहार की नदियों पर भी बढ़ा दबाव

काठमांडू : नेपाल में लगातार हो रही बारिश के कारण एक बार फिर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। देश के कई हिस्सों में नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जबकि भारी बारिश के कारण 26 जिलों में प्रमुख सड़कों और राजमार्गों पर आवाजाही रोकनी या सीमित करनी पड़ी है। नेपाल के मौसम एवं जल विज्ञान विभाग ने अगले कुछ दिनों में कई नदी क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की है। इसका असर बिहार से लगी सीमा और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाली नदियों पर भी पड़ रहा है।

नेपाल में बारिश के कारण सप्तकोशी नदी का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है। सुनसरी जिले में स्थित कोसी बराज पर 25 सितंबर को 31 गेट खोल दिए गए और बराज को रेड अलर्ट की स्थिति में रखा गया। रिपोर्ट के अनुसार उस समय कोसी बराज से करीब 2.40 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया था। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने को कहा है, हालांकि यह प्रवाह उन वर्षों में दर्ज 5 लाख क्यूसेक से अधिक के स्तर से अभी कम बताया गया है। कोसी पुल पर फिलहाल वाहनों की आवाजाही जारी है, लेकिन जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आवश्यक निर्णय लेने की बात कही गई है।

नेपाल के अलग-अलग नदी क्षेत्रों में भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। काभ्रे जिले में रोशी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। नदी का जलस्तर 4.51 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का स्तर 4.50 मीटर है। इसके बाद चेतावनी सायरन बजाया गया। नुवाकोट की त्रिशूली और भक्तपुर की हनुमंते नदी में भी पानी चेतावनी स्तर तक पहुंचने की सूचना है। जल पूर्वानुमान विभाग ने आने वाले दिनों में कई नदी घाटियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से नेपाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। गांडकी और लुंबिनी प्रदेश के कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। कोशी, बागमती, गांडकी, लुंबिनी और कर्णाली समेत कई प्रदेशों में भारी बारिश के कारण छोटी नदियों और नालों में अचानक बाढ़ आने का खतरा बताया गया है। नेपाल के 12 जिलों को विशेष रूप से उच्च बाढ़ जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है। लगातार बारिश का असर नेपाल के सड़क संपर्क पर भी पड़ा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए 26 जिलों में कई सड़क मार्गों पर यातायात बंद या प्रतिबंधित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और जोखिम वाले पहाड़ी मार्गों पर रात में वाहन नहीं चलाने की अपील की है।

नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते जलस्तर का असर बिहार में भी दिखाई देने लगा है। सुपौल जिले में नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में बारिश के कारण तिलयुगा और खांडो नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। तिलयुगा नदी का पानी कमलपुर पंचायत के बघार क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पहुंच गया है। इस इलाके में एक हजार एकड़ से अधिक भूमि में धान की फसल लगी होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि नेपाल में दोबारा तेज बारिश हुई तो खेतों में पानी फैलने से फसल को नुकसान हो सकता है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार तिलयुगा और खांडो नदियों का जलस्तर सितंबर में पहले भी बढ़ चुका है। 18 सितंबर को भी दोनों नदियों का पानी खेतों में पहुंचा था। अब एक बार फिर जलस्तर बढ़ने से सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन से नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की मांग की गई है।

नेपाल की बारिश का असर बिहार की गंडक और कोसी नदियों पर भी पड़ रहा है। 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंडक और कोसी में पानी का प्रवाह बढ़ा है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ रहा था और जल संसाधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों एवं फील्ड कर्मियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया था। कोसी बराज के लिए भी 26 सितंबर की सुबह तक डिस्चार्ज बढ़ने का अनुमान जताया गया था।

नेपाल में पहले अगस्त में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के बाद अब सितंबर के अंत में फिर भारी बारिश ने राहत और पुनर्बहाली के प्रयासों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ताजा बारिश के कारण उन इलाकों में दोबारा बाढ़, भूस्खलन और मलबा बहने का खतरा बढ़ा है जो पहले ही आपदा से प्रभावित रह चुके हैं। फिलहाल नेपाल और बिहार के सीमावर्ती नदी क्षेत्रों में सबसे महत्वपूर्ण चिंता अगले 24 से 48 घंटे के दौरान होने वाली बारिश और नदियों के जलस्तर में होने वाली वृद्धि को लेकर है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश जारी रहने पर बिहार की कोसी, गंडक तथा अन्य सीमावर्ती नदियों के जलप्रवाह पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों पर नजर रखने की जरूरत है।