गरीबों के निवाले पर सवाल! सरकारी चावल प्रकरण में एसडीओ पूर्वी की भूमिका जांच के घेरे में
- Post By Admin on Oct 22 2026
- एमओ के लिखित आदेश पर पिकअप छोड़ने का दावा
- थानाध्यक्ष अभिषेक के पास एसडीओ से बातचीत के रिकॉर्डिंग का दावा
- डीएम के आदेश पर जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा
मुजफ्फरपुर: गरीबों की थाली तक पहुंचने वाले सरकारी अनाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, यदि उन्हीं की भूमिका पर कथित हेराफेरी के मामले में सवाल उठने लगें, तो व्यवस्था की जवाबदेही तय करना जरूरी हो जाता है। मुजफ्फरपुर जिले के कांटी में सरकारी चावल से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला कांटी स्थित सीएमआर गोदाम से निकले 400 बोरी चावल से जुड़ा है। दैनिक भास्कर में 22 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित खबर के अनुसार, ट्रक से 15 बोरी चावल उतारकर टाटा मैजिक पिकअप पर लादे जाने के दौरान पानापुर ओपी की गश्ती पुलिस ने वाहन को पकड़ लिया था। इसके बाद मामले की जांच हुई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे।
एसडीओ पूर्वी की भूमिका पर गंभीर सवाल
इस प्रकरण में एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव की भूमिका प्रमुखता से चर्चा में है। पानापुर ओपी अध्यक्ष अभिषेक कुमार मिश्रा के लिखित बयान के संबंध में प्रकाशित विवरण के अनुसार, एसडीओ पूर्वी ने उन्हें दो बार व्हाट्सऐप कॉल किया था। थानाध्यक्ष के बयान के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्राथमिकी दर्ज करने से मामला बड़ा होने की बात कही गई और जांच के बाद गाड़ी छोड़ने का निर्देश दिया गया।
थानाध्यक्ष का दावा है कि एसडीओ पूर्वी से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग उनके पास उपलब्ध है और इसे जांच कमेटी को भी सौंपा गया है। यदि रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की पुष्टि होती है और उसमें गाड़ी छोड़ने का निर्देश दर्ज मिलता है, तो यह पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है।
एमओ के लिखित आदेश पर छोड़ी गई पिकअप
ओपी अध्यक्ष अभिषेक के पक्ष के अनुसार, पिकअप को छोड़ने का निर्णय एमओ के लिखित आदेश के आधार पर लिया गया था। उनका यह भी कहना है कि थाना परिसर में वाहन को अंदर ले जाने का विकल्प उपलब्ध नहीं था। इन दावों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, पुलिस रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर की जानी चाहिए।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि थानाध्यक्ष ने वरीय अधिकारी को सूचना दी, खाद्यान्न की वीडियो भेजी और एमओ के लिखित आदेश के बाद पिकअप छोड़ी, तो उनकी भूमिका का आकलन करते समय इन तथ्यों को कितना महत्व दिया गया? साथ ही, कथित निर्देश देने वाले अधिकारी की भूमिका की जांच किस आधार पर की गई?
डीएम के आदेश पर जांच, कार्रवाई की अनुशंसा
दैनिक भास्कर की प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव के आदेश पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने मामले की जांच की। रिपोर्ट में एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव, एमओ अर्चित कुमार, पानापुर ओपी अध्यक्ष अभिषेक कुमार मिश्रा और ट्रांसपोर्टर राजेंद्र दुबे की भूमिका का उल्लेख है। संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने की बात भी प्रकाशित खबर में सामने आई है।
अब जांच की पारदर्शिता और निष्कर्षों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल हैं। क्या एसडीओ पूर्वी और थानाध्यक्ष के बयानों में सामने आए अंतर की पड़ताल की गई? क्या कथित कॉल रिकॉर्डिंग की जांच हुई? क्या एमओ के लिखित आदेश की वैधता और उसमें दिए गए निर्देशों की समीक्षा की गई? इन सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।
गरीबों के हक का अनाज, जवाबदेही किसकी?
सरकारी खाद्यान्न जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राशन पर निर्भर परिवारों के लिए चावल की हर बोरी की कीमत है। ऐसे में सरकारी अनाज के परिवहन के दौरान कथित अनियमितता सामने आना केवल विभागीय मामला नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा गंभीर विषय है।यदि खाद्यान्न की हेराफेरी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लेकिन जांच का दायरा किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जिस अधिकारी ने निर्देश दिया, जिसने लिखित आदेश जारी किया और जिसने उस पर कार्रवाई की, सभी की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परखी जानी चाहिए।
फिलहाल एसडीओ पूर्वी की भूमिका को लेकर उठे सवालों, थानाध्यक्ष के दावे और एमओ के लिखित आदेश की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी। सरकारी चावल गरीबों का हक है। इस हक की रक्षा के लिए निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि चावल के इस प्रकरण में वास्तव में क्या हुआ और यदि कहीं अनियमितता हुई, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।