मुजफ्फरपुर में साप्ताहिक वैदिक यज्ञ एवं सत्संग आयोजित, वैदिक संध्या के महत्व पर हुई चर्चा

  • Post By Admin on Oct 19 2026
मुजफ्फरपुर में साप्ताहिक वैदिक यज्ञ एवं सत्संग आयोजित, वैदिक संध्या के महत्व पर हुई चर्चा

मुजफ्फरपुर: घिरनी पोखर स्थित आर्य समाज मंदिर में रविवार को साप्ताहिक वैदिक यज्ञ एवं सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मधुबन (पूर्वी चंपारण) के प्राचार्य, बिहार राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा के महोपदेशक एवं उपप्रधान प्रो. (डॉ.) व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक ने वैदिक संध्या के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को आत्मिक उन्नति और परमात्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए प्रातः एवं सायंकाल संध्या-वंदन करना चाहिए। उनके अनुसार, वैदिक संध्या ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करने और अपने जीवन को सदाचार की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण, माता सीता और माता रुक्मिणी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय धार्मिक परंपरा में संध्या-वंदन का विशेष महत्व रहा है। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने भी पंचमहायज्ञविधि के माध्यम से ईश्वर-भक्ति और वैदिक जीवन पद्धति की प्रेरणा दी।

प्रो. शास्त्री ने बताया कि ‘संध्या’ शब्द का सरल अर्थ सम्यक् ध्यान है। उन्होंने 19 मंत्रों पर आधारित वैदिक संध्या को मनोयोगपूर्वक करने की बात कही। उनके अनुसार, नियमित संध्या-वंदन व्यक्ति के जीवन की दिशा और दशा को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। उन्होंने गायत्री मंत्र को महामंत्र और गुरु मंत्र के रूप में वर्णित करते हुए इसके नियमित पाठ एवं गायन के महत्व को समझाया। साथ ही आगमन मंत्र, इन्द्रियस्पर्श मंत्र और मार्जन मंत्र की भी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि वैदिक मंत्र व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देते हैं। मंत्रों के माध्यम से परमात्मा से सुख, कल्याण और सद्बुद्धि की प्रार्थना की जाती है। उन्होंने कहा कि सभी ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों का उपयोग शुभ कार्यों में होना चाहिए। नियमित संध्या-वंदन से आत्मिक बल बढ़ाने, मन में शांति बनाए रखने और जीवन में सदाचार को अपनाने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन आचार्य कमलेश दिव्यदर्शी ने किया। इस अवसर पर भागवत प्रसाद आर्य, अमरजीत कुमार शास्त्री, डॉ. अरविंद मेहता, अरुण कुमार आर्य, अनिल कुमार मेहता, अधिवक्ता दीन बन्धु आजाद और अरुण आचार्य सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रो. व्यास नन्दन शास्त्री वैदिक की दिवंगत माताश्री नुनावती देवी आर्या की आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। आर्य समाज की ओर से प्रार्थना कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद गीता पाठ और शांति पाठ का आयोजन हुआ।