म्यूल खातों पर निगरानी के बीच पासबुक अपडेट की अहमियत बढ़ी, सालाना 2 करोड़ बार अपडेट
- Post By Admin on Oct 23 2026
गाजियाबाद : जिले में डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद बड़ी संख्या में ग्राहक अपने बैंक खाते में जमा और निकासी की जानकारी के लिए भौतिक पासबुक पर निर्भर हैं। ऐसे में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) केंद्रों पर पासबुक प्रिंटिंग की सुविधा ग्राहकों को घर के नजदीक ही बैंकिंग लेनदेन का रिकॉर्ड उपलब्ध करा रही है। नियमित रूप से पासबुक अपडेट कराने से ग्राहक अपनी जमा राशि, निकासी और खाते में दर्ज अन्य लेनदेन की जांच कर सकते हैं। इससे अनजान या संदिग्ध लेनदेन की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
अप्रैल 2025 से जून 2026 के बीच करीब 130 जिलों के वीडियो-KYC डेटा के अध्ययन में गाजियाबाद को म्यूल खातों से जुड़ी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया। म्यूल खाते ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल धोखाधड़ी से प्राप्त धन को रखने या एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए किया जा सकता है। अध्ययन में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी, बरेली, वाराणसी, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, लखनऊ और गाजियाबाद के अलावा हरियाणा के पानीपत तथा राजस्थान के जोधपुर को भी सूची में शामिल किया गया। वीडियो-KYC अस्वीकृति दर लखीमपुर खीरी में 14.03 प्रतिशत, बरेली में 13.37 प्रतिशत और वाराणसी में 12.32 प्रतिशत दर्ज की गई।
अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान चिह्नित किए गए करीब 85 से 90 प्रतिशत फ्रॉड हॉटस्पॉट बाद में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई या मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से भी सामने आए। ऐसे में बैंकिंग लेनदेन की नियमित जांच और खाते के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। BLS E-Services Ltd. के डिप्टी सीईओ आशीष मिश्रा ने कहा, “पासबुक असिस्टेड बैंकिंग ग्राहकों के लिए आज भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। BC केंद्र पर इसे अपडेट कराने की सुविधा से ग्राहक अपने खाते में होने वाली गतिविधियों की जानकारी तुरंत हासिल कर सकता है।” कंपनी के मुताबिक, BLS E-Services ने अपने बीसी नेटवर्क में 10 हजार से अधिक पासबुक प्रिंटर लगाए हैं। इन प्रिंटरों के माध्यम से हर साल करीब दो करोड़ पासबुक अपडेट किए जाते हैं। यह नेटवर्क उन ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में मददगार है, जिन्हें हर छोटे लेनदेन के लिए बैंक शाखा जाना सुविधाजनक नहीं लगता।
पासबुक प्रिंटिंग की सुविधा वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनधारकों, महिलाओं और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। पासबुक में दर्ज प्रविष्टियों का बैंक से प्राप्त एसएमएस या अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान करके ग्राहक यह जांच सकता है कि खाते में पैसा सही तरीके से जमा हुआ है या नहीं और कोई अनधिकृत निकासी तो नहीं हुई है। हालांकि, केवल पासबुक अपडेट कराने से बैंकिंग धोखाधड़ी पूरी तरह नहीं रोकी जा सकती। ग्राहकों को अपने बैंक खाते के लेनदेन पर नियमित नजर रखने, संदिग्ध प्रविष्टि दिखने पर तुरंत बैंक को सूचित करने और किसी के साथ ओटीपी, पिन या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की भी जरूरत है।