जलवायु संकट का कहर : आग, बाढ़ और तूफानों से दुनिया को 120 अरब डॉलर की चपत

  • Post By Admin on Jan 10 2026
जलवायु संकट का कहर : आग, बाढ़ और तूफानों से दुनिया को 120 अरब डॉलर की चपत

दुनिया के लिए वर्ष 2025 जलवायु संकट की भयावह तस्वीर लेकर सामने आया। अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था Christian Aid की रिपोर्ट Counting the Cost 2025 के अनुसार, बीते साल जलवायु से जुड़ी आपदाओं ने वैश्विक स्तर पर 120 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान किया। यह नुकसान केवल धन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी, घर और आजीविका भी इसकी चपेट में आ गई।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 के दौरान दुनिया भर में कम से कम दस ऐसी भीषण जलवायु आपदाएं हुईं, जिनमें प्रत्येक से एक अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में लगी विनाशकारी जंगलों की आग ने अकेले 60 अरब डॉलर से अधिक की क्षति पहुंचाई। वहीं दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में आए तूफान और बाढ़ की घटनाओं में 1,700 से ज्यादा लोगों की जान गई और करीब 25 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया।

भारत और उसके पड़ोसी देशों के लिए भी 2025 बेहद कठिन साबित हुआ। भारत और पाकिस्तान में आई भीषण बाढ़ में 1,860 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि करीब 5.6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया उन क्षेत्रों में शामिल रहा, जहां सबसे ज्यादा तबाही हुई, जबकि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इन देशों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है।

Christian Aid की रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि ये आपदाएं केवल “प्राकृतिक” नहीं हैं, बल्कि दशकों से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता और राजनीतिक स्तर पर फैसलों में देरी का नतीजा हैं। इम्पीरियल कॉलेज लंदन की प्रोफेसर जोआना हेग के अनुसार, “ये घटनाएं किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि उस रास्ते का नतीजा हैं जिसे मानवता ने खुद चुना है।”

रिपोर्ट यह भी उजागर करती है कि अमीर देशों में आर्थिक नुकसान अधिक दर्ज होता है, क्योंकि वहां संपत्ति और बीमा का दायरा बड़ा है। वहीं गरीब देशों में वास्तविक पीड़ा कहीं अधिक है, जहां लोग सब कुछ खो देते हैं, लेकिन उनकी क्षति आंकड़ों में पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाती। नाइजीरिया, कांगो, ईरान और अफ्रीका के कई हिस्सों में ऐसी ही गंभीर स्थितियां देखने को मिलीं।

Christian Aid के सीईओ पैट्रिक वॉट ने कहा कि जलवायु संकट अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई बन चुका है। उन्होंने आगाह किया कि यदि सरकारें अब भी जीवाश्म ईंधन से दूरी नहीं बनातीं और जलवायु वित्त को लेकर किए गए वादों को पूरा नहीं करतीं, तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा कमजोर और गरीब समुदायों को भुगतना पड़ेगा।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2025 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, जंगलों की आग, सूखा और समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि दुनिया के लगभग हर हिस्से में महसूस की गई। यह संकेत है कि जलवायु संकट अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी मानवता के लिए चुनौती बन चुका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि एक सख्त चेतावनी है—यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह नुकसान और भी भयावह रूप ले सकता है।