ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का अल्टीमेटम : अब कार्यवाई तय, वैश्विक राजनीति में हलचल
- Post By Admin on Jan 20 2026
वेनेजुएला : वेनेजुएला के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजरें ग्रीनलैंड पर टिक गई हैं। ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर ट्रंप के आक्रामक तेवर सामने आए हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में कथित रूसी खतरे का हवाला देते हुए संकेत दिए हैं कि अब केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का समय आ गया है। ट्रंप के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल मच गई है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए डेनमार्क पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि डेनमार्क लंबे समय से ग्रीनलैंड को रूसी खतरे से सुरक्षित रखने में असफल रहा है और अब इस दिशा में निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि नाटो पिछले 20 वर्षों से डेनमार्क को ग्रीनलैंड में रूसी प्रभाव को रोकने की चेतावनी देता आ रहा है, लेकिन दुर्भाग्यवश अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है और इस मुद्दे पर एक्शन जरूर लिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का इंतजार
ट्रंप के इस बयान पर अब तक व्हाइट हाउस, डेनमार्क सरकार, डेनिश प्रेजिडेंसी या यूरोपीय संघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहले भी जता चुके हैं ग्रीनलैंड पर दावा
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के शीर्ष नेताओं ने साफ तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड न तो बिक्री के लिए है और न ही कभी अमेरिका का हिस्सा बनेगा।
टैरिफ की चेतावनी भी दे चुके हैं ट्रंप
हाल ही में ट्रंप ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी थी कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो अमेरिका टैरिफ जैसे कड़े कदम उठा सकता है। इससे यूरोप-अमेरिका संबंधों में तनाव की आशंका भी जताई जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहे हैं मुद्दा
ट्रंप ग्रीनलैंड में रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि चूंकि ग्रीनलैंड नाटो के सुरक्षा ढांचे का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अमेरिका की जिम्मेदारी भी बनती है।