होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण, अमेरिका संग बनेगा संकट समाधान केंद्र
- Post By Admin on Jun 24 2026
तेहरान : अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में आयोजित पहले दौर की वार्ता में शामिल ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलिबाफ पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा प्रबंधन ईरान के नियंत्रण में रहेगा और किसी भी संभावित विवाद के त्वरित समाधान के लिए अमेरिका के साथ मिलकर एक विशेष केंद्र तथा टेलीफोन हॉटलाइन स्थापित की जाएगी।
गलिबाफ ने कहा कि समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन ईरान द्वारा बनाए गए प्रावधानों और नियमों के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्ष एक समन्वय केंद्र और हॉटलाइन व्यवस्था पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा और अब इसके प्रबंधन के लिए नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
स्विट्जरलैंड वार्ता का जिक्र करते हुए गलिबाफ ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरानी राष्ट्रपति, प्रतिनिधिमंडल और संभावित हमलों को लेकर धमकी दी गई थी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से आपत्ति जताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते की पहली शर्त ही यह है कि बातचीत धमकी या दबाव के बिना होगी। गलिबाफ के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विरोध स्वरूप बैठक छोड़ दी और वापस नहीं लौटा। बाद में अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए नई बैठक का प्रस्ताव रखा, लेकिन ईरान ने सीधे वार्ता से इनकार कर दिया। इसके बाद कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ी।उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने सिद्धांतों पर कायम है और अब तक उसने यह सुनिश्चित किया है कि अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ एक ही फोटो या फ्रेम में भी नजर न आए।
गलिबाफ ने सैन्य और कूटनीतिक प्रयासों के संतुलन पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी सैन्य सफलता को स्थायी बनाने के लिए उसे कानूनी और राजनीतिक मान्यता मिलना आवश्यक है। उनके अनुसार, कूटनीति के बिना युद्धक्षेत्र में मिली उपलब्धियां लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकतीं और बातचीत भी संघर्ष को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।