भारत की वायु शक्ति बढ़ाने की तैयारी, 114 राफेल जेट के लिए डसॉल्ट का ₹3.25 लाख करोड़ का प्रस्ताव

  • Post By Admin on Aug 14 2026
भारत की वायु शक्ति बढ़ाने की तैयारी, 114 राफेल जेट के लिए डसॉल्ट का ₹3.25 लाख करोड़ का प्रस्ताव

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत को 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिए लगभग ₹3.25 लाख करोड़ का तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव सौंप दिया है। यह प्रस्ताव भारत द्वारा मई 2026 में भेजे गए ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ के जवाब में दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित डील में बड़े पैमाने पर स्थानीय उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) का प्रावधान शामिल है। इससे भारत में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।फरवरी 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल) ने इस खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ प्रदान की थी। अब तकनीकी मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 18 राफेल विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था (फ्लाई-अवे कंडीशन) में भारत को मिलेंगे, जबकि शेष 96 विमानों को भारत में असेंबल किया जाएगा। इस मॉडल के तहत 80 प्रतिशत से अधिक विमानों का असेंबली कार्य देश में होने की संभावना है। शुरुआती चरण में स्वदेशी सामग्री का स्तर लगभग 30 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसे बाद में बढ़ाकर 60 प्रतिशत से अधिक किया जा सकता है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल फाइटर जेट हैं, जो अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन और पश्चिम बंगाल के हासीमारा स्थित 101 स्क्वाड्रन में तैनात हैं। इन विमानों ने वायुसेना को आधुनिक मल्टीरोल लड़ाकू क्षमता प्रदान की है, लेकिन पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर बढ़ती रणनीतिक जरूरतों के मुकाबले यह संख्या पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिग-21 जैसे पुराने लड़ाकू विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाए जाने के कारण वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या लगातार घट रही है। वहीं तेजस Mk-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) जैसे स्वदेशी कार्यक्रमों को पूरी तरह सेवा में आने में अभी कुछ वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में 114 अतिरिक्त राफेल विमानों की संभावित खरीद को केवल मौजूदा बेड़े के विस्तार के रूप में नहीं, बल्कि भारत की वर्तमान युद्धक क्षमता और भविष्य की स्वदेशी फाइटर फोर्स के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद परियोजनाओं में शामिल होगा और वायुसेना की परिचालन क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेगा।