ईरान की हवाई नाकेबंदी: अमेरिका के सेकेंडरी प्रतिबंधों की चेतावनी से विदेशी एयरपोर्ट्स में हड़कंप
- Post By Admin on Sep 22 2026
वाशिंगटन : अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान की वित्तीय व्यवस्था पर शिकंजा कसते हुए घोषणा की है कि इस सप्ताह से ईरानी एयरलाइंस का अंतरराष्ट्रीय संचालन पूरी तरह ठप हो सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने विदेशी कंपनियों को सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि उन्होंने ईरानी विमानन कंपनियों को सेवाएं देना जारी रखा, तो उन पर गंभीर सेकेंडरी प्रतिबंध थोपे जाएंगे। वाशिंगटन का यह सख्त रुख केवल ईरानी एयरलाइंस तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में उनके संचालन को समर्थन देने वाले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, टिकटिंग प्लेटफॉर्म्स, ईंधन आपूर्तिकर्ताओं और ग्राउंड हैंडलिंग फर्मों को भी इसके दायरे में लाया गया है।
कार्रवाई की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बेसेन्ट ने स्पष्ट किया कि ईरानी विमानों के लैंड करने पर यदि कोई विदेशी एजेंसी उन्हें ईंधन, लैंडिंग सेवाएं या टिकट बिक्री की सुविधा देती है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय डॉलर प्रणाली से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा। अमेरिकी वित्त मंत्री के अनुसार, 23 सितंबर तक ईरानी उड़ानों को वैश्विक स्तर पर प्रभावी रूप से जमींदोज किया जा सकता है। यह कदम राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आर्थिक दबाव अभियान और बेसेन्ट की 'इकोनॉमिक डी-डे' रणनीति का हिस्सा है, जिसका मुख्य लक्ष्य तेहरान के वित्तीय ढांचे को पूरी तरह बेअसर करना है।
अमेरिकी अल्टीमेटम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत असर दिखने लगा है। हालांकि ईरान ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, लेकिन कई देशों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इराक ने ईरानी एयरलाइंस की उड़ानों को निलंबित करने की पुष्टि की है, जबकि जॉर्जिया ने ईरानी विमानों के अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, तुर्की सरकार के अनुरोध के बाद ईरान की प्रमुख विमानन कंपनी महान एयर ने तुर्की के लिए अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं। दशकों पुराने प्रतिबंधों के कारण ईरान का नागरिक उड्डयन क्षेत्र पहले से ही नए विमानों, स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस सेवाओं की भारी कमी झेल रहा है।
वित्त मंत्री बेसेन्ट का यह बयान चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ हुई उच्चस्तरीय आर्थिक वार्ता के ठीक बाद सामने आया है, जो ट्रंप और शी चिनफिंग के प्रस्तावित शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर आयोजित की गई थी। उल्लेखनीय है कि चीन ईरान का प्रमुख व्यापारिक और कूटनीतिक साझेदार है।
अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव फरवरी में उस समय चरम पर पहुंचा था, जब अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मौत हो गई थी। जवाबी कार्रवाई में तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न करने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची थी। उसी के बाद से अमेरिका ने ईरान के पूरे एविएशन नेटवर्क और उससे जुड़ी विदेशी कंपनियों पर अपनी वित्तीय पाबंदियों को बेहद सख्त कर दिया है।