रूसी तेल पर ट्रंप के फैसले से भारत को राहत, 100% अतिरिक्त शुल्क का खतरा टला

  • Post By Admin on Oct 17 2026
रूसी तेल पर ट्रंप के फैसले से भारत को राहत, 100% अतिरिक्त शुल्क का खतरा टला

वॉशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से जुड़े नए प्रतिबंधों और शुल्क संबंधी प्रावधानों को लागू करने से फिलहाल छूट देने का फैसला किया है। इस निर्णय से भारत और चीन जैसे देशों को तत्काल राहत मिल सकती है, क्योंकि ये देश रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों के अमेरिकी बाजार में आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता था।

ट्रंप ने यह फैसला उस समय लिया, जब संबंधित प्रावधानों के लागू होने की समयसीमा नजदीक थी। अमेरिकी प्रशासन ने इसके लिए राष्ट्रीय हित का हवाला दिया है। हालांकि, इस कदम का अर्थ यह नहीं है कि रूस से जुड़े सभी प्रतिबंध स्थायी रूप से समाप्त कर दिए गए हैं। राष्ट्रपति ने संबंधित प्रावधानों पर छूट दी है, जबकि आगे की कार्रवाई का विकल्प खुला रखा गया है।

क्या था अमेरिका का नया कानून?

रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से अमेरिका ने सितंबर 2026 में लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 को कानून बनाया था। इस कानून में रूस के ऊर्जा कारोबार से जुड़े प्रतिबंधों के साथ उन देशों पर भी कार्रवाई का प्रावधान था, जो रूसी तेल और गैस खरीदते हैं या प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करते हैं। कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता था। इसके अतिरिक्त रूस से आयात होने वाले सामान पर भी भारी शुल्क और अन्य प्रतिबंध लगाने के प्रावधान शामिल थे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से होने वाली कमाई पर दबाव बनाना था, ताकि यूक्रेन के साथ जारी युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके। लेकिन भारत जैसे देशों ने आशंका जताई थी कि इस तरह के कदम से उनके अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

भारत को क्यों मिल सकती है राहत?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल खरीदता है और रूस भी उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। यदि अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता, तो भारतीय उत्पादों के अमेरिकी बाजार में पहुंचने की लागत बढ़ सकती थी। इससे भारत के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ने की आशंका थी। ट्रंप के ताजा फैसले से फिलहाल इस अतिरिक्त शुल्क का तत्काल खतरा कम हुआ है। चीन को भी इसी तरह राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को रूसी तेल खरीदने के संबंध में भविष्य में अमेरिकी दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अमेरिकी प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खरीद पर नजर रखने का निर्देश भी दिया है। अधिकारियों को ऐसे घटनाक्रम की जानकारी देने को कहा गया है, जिनके आधार पर भविष्य में प्रतिबंधों या शुल्क संबंधी कदमों पर फिर विचार किया जा सकता है।

फैसले के पीछे क्या वजह हो सकती है?

अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें और आम लोगों पर महंगाई का असर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे समय में रूस से तेल और गैस के कारोबार पर सख्ती करने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। रिपोर्टों में ट्रंप के फैसले को अमेरिकी आर्थिक हितों और ऊर्जा कीमतों से भी जोड़कर देखा गया है।

इसके अलावा, रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन की नीति पर भी चर्चा हो रही है। एक तरफ अमेरिका रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के उपायों पर विचार करता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले से उसकी रणनीति को लेकर सवाल उठे हैं।

फैसले पर क्यों हो रही है आलोचना?

अमेरिका में कुछ सांसदों और आलोचकों ने इस कदम पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लागू करने में ढील देने से मॉस्को पर आर्थिक दबाव कम हो सकता है। वहीं, ट्रंप प्रशासन ने अपने निर्णय को अमेरिका के राष्ट्रीय हितों से जुड़ा बताया है।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि नए शुल्कों और प्रतिबंधों पर दी गई छूट से भारत को कुछ समय के लिए राहत मिली है, लेकिन आगे की स्थिति अमेरिकी सरकार की नीति पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर निगरानी किस तरह जारी रखता है और क्या भविष्य में कोई नया प्रतिबंध या शुल्क लागू किया जाता है।