STET अभ्यर्थियों ने चलाया ट्विटर कैंपेन

  • Post By Admin on Jul 29 2020
STET अभ्यर्थियों ने चलाया ट्विटर कैंपेन

पटना: STET अभ्यर्थियों ने BSEB द्वारा रद्द किए गए STET के परिणाम पर विचार कर परिणाम फिर जारी करने व प्राथमिक शिक्षक (1-8) बहाली खुलवाने हेतु दिनांक 28 जुलाई को रात्रिकालीन ट्विटर कैंपेन का आयोजन किया।
यह ट्विटर कैंपेन काफी सफल रहा व भारतवर्ष में 13वें तथा बिहार में 1st स्थान पर यह ट्रेंड करता रहा। ट्विटर का हैशटैग था, '#नियोजन_ नहीं_ तो _वोट_नहीं'। ऐसे में इस STET का रिजल्ट बिना कारण रद्द करना व प्राथमिक शिक्षक नियोजन में अड़चन आगामी बिहार विधानसभा चुनाव हेतु भी एक फैक्टर बनकर उभड़ सकता है, बिहार की स्वास्थ्य-व्यस्वस्था, बुनियादी सुविधाएँ आदि भी असंतोषप्रद रही हैं। ऐसे में पब्लिक सहित छात्रों में भी काफी रोष है। 2011 के बाद 2020 में STET (माध्यमिक/उच्च-माध्यमिक परीक्षा) आयोजित की गई थी। इतने लंबे अरसे बाद भी इस परीक्षा के परिणाम पर ग्रहण लग गया है या अभ्यर्थियों की कहें तो जानबूझकर शिक्षा माफियाओं व कुर्सी की आड़ में कमाई करनेवाले नेताओं द्वारा STET परीक्षा पर ग्रहण थोप दिया गया है। ऐसे में अभ्यर्थियों द्वारा लाखों की संख्या में 28 जुलाई को रात्रिकाल में ट्वीट किए गए।

STET मुद्दा पहले से ही बिहार में काफी गर्म रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना किसी कारण के ही उनका रिजल्ट रद्द कर दिया गया। जबकि STET की पुनर्परीक्षा भी आयोजित की गयी थी। साथ ही उसका आंसर-की भी जारी किया गया था तथा रिजल्ट प्रकाशन करने के समय BSEB द्वारा रिजल्ट रद्द कर दिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस रिजल्ट रद्द करने में बड़े शिक्षा माफियाओं व नेताओं का हाथ है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे साफसुथरी परीक्षा आज के पूर्व सूबे में कभी आयोजित नहीं की गई। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक निर्णय में यह स्पष्ट किया था कि जबतक किसी परीक्षा में न्यूनतम 10% कदाचार की पुष्टि न हो जाती, तबतक कोई परीक्षा रद्द न की जाए। इस परीक्षा में जैमर भी लगा था व साथ ही जूते, घड़ी आदि पहनकर भी परीक्षा-कक्ष में जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में मेधावी छात्रों के साथ कहीं-न-कहीं नाइंसाफी की गई है। पुनर्परीक्षा आयोजित कर व उसकी उत्तर-कुंजी जारी कर लगभग 6 महीने बाद परीक्षा रद्द कर देना कहीं से भी न्यायोचित नहीं, ऐसा अभ्यर्थियों का कहना है। इसके विरुद्ध उच्च-न्यायालय पटना में चार बड़े मुकदमे भी किये गए हैं। सरकारी वकील लगातार इस प्रकरण में लगातार बचने की कोशिश करते रहे हैं व AG लगातार अनुपस्थित रहकर तारीख-पर-तारीख लेने की कोशिश कर रहे। अभ्यर्थियों का कहना है कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा ताकि अभ्यर्थी BSEB के निर्णय के समक्ष झुक जाएँ.. लेकिन अभ्यर्थियों ने कहा है कि वे STET अभ्यर्थियों के न्याय हेतु सरकार व BSEB को सर्वोच्च न्यायालय तक भी चुनौती देने को तैयार हैं। BSEB ने पहले ही कोर्ट में अपने हाथ खड़े कर दिए हैं व कोर्ट के समक्ष कोई भी दलील देने से मना कर दिया है। भारत सरकार के एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार की माध्यमिक शिक्षा ऐसे ही चरमराई हुई है। ऐसे में STET अभ्यर्थियों के साथ यह खिलवाड़ समझ के पड़े है। जनाधिकार पार्टी के अध्यक्ष माननीय पप्पू यादव जी व ABVP ने आगे आकर अभ्यर्थियों के पक्ष में आवाज उठाई मगर इसका भी कोई प्रभाव नहीं।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा है कि सरकार को इस STET परीक्षा में किसी प्रकार के कदाचार की कोई आशंका हो तो निम्न 2 विकल्पों में किसी एक के चयन हेतु स्वतंत्र है-

• जो भी अभ्यर्थी अधिक अंक प्राप्त कर रहे हैं, उनका साक्षात्कार हो या केवल उन अधिक अंक प्राप्त करनेवालों की पुनर्परीक्षा आयोजित हो। इससे दूध-का-दूध व पानी-का-पानी हो जाएगा। इससे सरकार व STET अभ्यर्थियों का समय भी बचेगा।
•सरकार CBI से निष्पक्ष जाँच करवा ले।

ऐसे में उपरोक्त दो विकल्प STET अभ्यर्थियों द्वारा सरकार के समक्ष रखे गए है। अभ्यर्थियों द्वारा लगातार इस STET एग्जाम के रद्द होने का विरोध विभिन्न मंचों से होता रहा है और वे अभी भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं, कई आंदोलन किए गए, विधायकों को पत्र लिखा गया, लगातर कई ट्विटर कैंपेन किए गए आदि। इस ट्विटर कैंपेन में STET रिजल्ट/प्राथमिक शिक्षक नियोजन की बेसब्री से राह देख रहे अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। इस कैंपेन में करण कश्यप, विश्वजीत कुमार, नवनीत कुमार, सोनू कुमार सोनी, पूजा, स्वर्ण लता, चाणक्य ट्यूटोरियल के निदेशक सत्य प्रकाश, सिंधु, निरंजन कश्यप, मो. जावेद, मो. कैसर, वंदना मिश्रा, प्रेम कुमार, नंदिनी, राहुल, हरिशंकर कुमार, शांतिनिकेतन के प्रिंसिपल संजीव कुमार, आरती कुमारी, बबिता, अंशु, मोनी कुमारी, दीपिका कुमारी, मुदस्सर, मो. अल्लाम, कुणाल, ममता, मंटू, नेहा, आलोक श्रीवास्तव, करिश्मा, शकीला फिरदौस, रोजी, राजेश श्रीवास्तव, कहकशां, प्रीति, पूनम आदि ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके अतिरिक्त कई यूट्यूब चैनल का भी समर्थन देखने को मिला। देखना यह है कि बिहार के भावी शिक्षकों (STET/प्राथमिक शिक्षक) को इस इंसाफ की लड़ाई में इंसाफ मिल भी पाता है या नहीं, यह अभी भी भविष्य के गर्भ में है।