ऋषि-मुनियों की धरोहर 'स्पर्श चिकित्सा' भी आयुष में शामिल हो : सतीश राय

  • Post By Admin on Aug 02 2021
ऋषि-मुनियों की धरोहर 'स्पर्श चिकित्सा' भी आयुष में शामिल हो : सतीश राय

प्रयागराज: सहस्त्रों वर्ष पूर्व भारत में हमारे ऋषि-मुनियों की धरोहर ‘स्पर्श चिकित्सा’ का लोगों को ज्ञान था। यह अति प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। धीरे-धीरे इसे लोग भूल गए। भारत में सबसे सरल इलाज की पद्धति स्पर्श चिकित्सा को जो स्थान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। ऐसे में सरकार इस पर रिसर्च कर इसका परीक्षण करे और सफलता मिलने पर इसको बढ़ावा देने के लिए इसे आयुष में शामिल करने के लिए उचित कार्रवाई करें।

उक्त विचार एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान के जाने-माने रेकी ग्रैंड मास्टर सतीश राय ने हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि से वार्ता के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इंसान के अंदर अपार ऊर्जा का भंडार है। इसके साथ इंसान के शरीर की सुरक्षा के रूप में आभामंडल है जो शरीर को हमेशा अपने घेरे में रखता है। यह भी एनर्जी का एक फील्ड है जिसे हम सूक्ष्म शरीर भी कहते हैं। जब एनर्जी की फील्ड असंतुलित हो जाती है तब व्यक्ति विभिन्न विकारों एवं बीमारियों से घिरने लगता है। उन्होंने कहा कि स्पर्श चिकित्सा की शक्ति मनुष्य की शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास कर रोग के कारणों का जड़ से नाश करती है।

सतीश राय ने कहा कि स्पर्श चिकित्सा से किसी भी वस्तु की ऊर्जा बढ़ाई जा सकती है। चाहे वह मनुष्य हो, जीव जंतु हो, पशु पक्षी हो या पेड़ पौधे हों। अर्थात टच-थेरेपी ह्यूमन बॉडी पर ही नहीं बल्कि पेड़ पौधों पर भी कारगर है। उन्होंने कहा लोग भले ही विश्वास ना करें, लेकिन ऋषि मुनियों के जमाने में इस थेरेपी का यूज किया जाता रहा है। वर्तमान के आधुनिक युग में टच थेरेपी से कम लोग ही परिचित होंगे। वर्तमान में कोरोना वायरस के कहर को लोगों ने देखा है और चिकित्सा इतनी ज्यादा महंगी हो गई है कि सभी लोग इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें भारतीय चिकित्सा पद्धति में अपना रक्षक नजर आने लगा है। महंगे इलाज के कारण लोगों का झुकाव देशी पुरानी इलाज पद्धतियों पर बढ़ रहा है।

वरिष्ठ रेकी चैनल सूर्य नारायण त्रिपाठी ने कहा कि किसी को टच करिए और उपचार हो जाए अर्थात छूने मात्र से जो उपचार हो वह स्पर्श चिकित्सा है। इससे उपचार करने में शरीर की संचित ऊर्जा ही दवा बन जाती है। आयुष चिकित्सा पद्धति में योगा, यूनानी, आयुर्वेद, सिद्ध एवं होम्योपैथ शामिल है। उसमें स्पर्श चिकित्सा जो प्राचीनतम चिकित्सा विज्ञान है, जो पूर्णरूप से प्राकृतिक सिद्धांतों पर आधारित है, को भी आयुष में शामिल होना चाहिए। क्योंकि यह सबसे सस्ती, सरल, सुविधाजनक और दुष्प्रभाव रहित चिकित्सा पद्धति है।