प्रभारी थानाध्यक्ष शराब की डील करते रंगे हाथ गिरफ्तार

  • Post By Admin on Mar 01 2021
प्रभारी थानाध्यक्ष शराब की डील करते रंगे हाथ गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर : पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार के मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से मौत के बाद भी नहीं मान रहे हैं सुशासन बाबू के साहब। शुक्रवार की देर रात जिले के सदर थाना क्षेत्र के कच्ची पक्की इलाके में एंटी लिकर टास्क फोर्स की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर एक गाड़ी में लदे 22 ड्रम कच्चा स्प्रिट पकड़ा है। उसके बाद जब तलाशी शुरू की तो करजा थाना के प्रभारी थाना अध्यक्ष पीएसआई बीके यादव और एक सदर थाना के चौकीदार का पुत्र शराब माफिया से डील करते हुए पाया गया, जिसकी सूचना एंटी लिकर टास्क फोर्स ने एसएसपी सहित बड़ी अधिकारियों को दी। फोन पर पूछे जाने पर बड़े अधिकारियों को करजा थाना के प्रभारी थाना अध्यक्ष ने कहा कि शराब की सूचना पर छापेमारी करने आये थे लेकिन पुलिस मैनुअल के अनुसार कोई भी थानाध्यक्ष दूसरे थाना क्षेत्र में छापेमारी या फिर किसी क्रिमिनल की गिरफ्तारी के लिए अपने बड़े अधिकारियों से इजाजत मिलने के बाद ही उक्त थाना के सहयोग से छापेमारी और गिरफ्तारी करते हैं। लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया साहब ने, वह सिर्फ इसलिए क्योंकि यह डील शराब माफिया से थी। दूसरे को शामिल करने के बाद परेशानी बढ़ जाती।

गिरफ्तार पीएसआई बीके यादव पूर्व में भी सदर थाना में एक मवेशी को ले जा रहे व्यवसायी से लूटपाट और छिनतई मामले में वरीय अधिकारियों द्वारा निलंबित किये गये थे जिसमें मवेशी व्यवसायी ने यह आरोप लगाया था कि जबरन उनसे दो लाख रुपये छीना गया। पूरे मामले में सीसीटीवी में भी घटना कैद हो गई थी, जिसके बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की थी। लेकिन इसके बाद भी बीके यादव ने अपनी आदत नहीं छोड़ी। कहा जा सकता है कि पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में सुशासन बाबू के अधिकारी जहरीली शराब से लोगों की मौत और पुलिस कर्मियों की शहादत की परवाह किये बगैर सिर्फ अपनी जेब की भरपाई करने में लगे हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि गिरफ्तार किये गये प्रभारी थाना अध्यक्ष का आगे क्या होगा। लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी उनका कहना था कि पैसे का हर जगह मोल है। सब कुछ मैनेज हो जायेगा। पूरे मामले पर पूछे जाने पर एसएसपी जयंत कांत ने कहा कि चाहे कोई आम हो या फिर खास, शराब और अपराध के लिए किसी को छूट नहीं है। पुलिस अपना काम करेगी, चाहे कोई हमारे बीच का ही क्यों ना हो। गलत करने पर कार्रवाई के हकदार तो होंगे ही।