नेता प्रतिपक्ष ने नहीं खिलाया रामरतन का प्रसिद्ध हलवा : मुख्यमंत्री योगी

  • Post By Admin on Mar 03 2021
नेता प्रतिपक्ष ने नहीं खिलाया रामरतन का प्रसिद्ध हलवा : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ : विधानसभा में बजट 2021-22 पर चर्चा के दौरान बुधवार को एक बार फिर बलिया के प्रसिद्ध रामरतन के हलवे का जिक्र हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुटकी लेते हुए नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी पर अपने क्षेत्र के इस हलवे को अभी तक नहीं खिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने किसानों को लेकर सदन में हुई चर्चा को लेकर कहा कि पहले दिन से इस पर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मुझे लगा था नेता प्रतिपक्ष इस दौरान हमें राम रतन का हलवा खिला ही देंगे। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने खड़े होकर कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान कॉन्ट्रैक्ट खेती के सम्बन्ध में है। उन्होंने कहा कि यह सही है कि रामरतन का हलवा बेहद अच्छा है। लेकिन, उसने स्वयं कहा है कि वह इसके लिए गाजर बाजार से खरीदता है। दुकानदार कह चुका है कि वह कोई कॉन्ट्रैक्ट खेती नहीं करते हैं। 

उन्होंने कहा कि जहां तक मुख्यमंत्री के हलवा खाने की बात है, वह सदन के खत्म होने के बाद जब वहां जाएंगे तो वहां से लाकर इसे खिला देंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अखिलेश यादव जी के लिए वह हलवा हमेशा आता था। श्रीमती इन्दिरा गांधी के घर के लिए भी वह हलवा जाता रहा और अब नेता सदन के वहां भी आ जाएगा। उन्होंने कहा कि लेकिन कॉन्ट्रैक्ट खेती का जो संदर्भ नेता सदन ने दिया था, उससे यह परे है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने एक व्यक्ति ने कहा था कि जिसने 30 बसंत बिताई है, यानी जिसकी 30 साल की उम्र हो उसकी बुद्धि परिपक्व हो जाती है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तो 70 बसंत बिता चुके हैं। उन्हें इस बात का एहसास हो जाना चाहिए कि नेता सदन ने किस परिपेक्ष्य में और क्या कहा था। 

नेता प्रतिपक्ष को जाता है सबसे पहला निमंत्रण पत्र 

इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हंसमुख अन्दाज में कहा यह तय है कि नेता प्रतिपक्ष सदन को हलवा नहीं खिलाएंगे। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष की ओर से इसके लिए हामी भरने पर उन्होंने कहा कि वह अकेले हलवा नहीं खाएंगे। उनहोंने सभी सदस्यों को खिलाने की बात कही। जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने भी मुख्यमंत्री से कुछ नहीं खिलाने और चाय के लिए भी आमंत्रित नहीं करने की बात कही। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जितने भी अतिथि मुख्यमंत्री आवास पर आते हैं, उनके निमंत्रण को लेकर सबसे पहला निमंत्रण पत्र नेता प्रतिपक्ष को ही जाता है और बड़े सम्मान के साथ जाता है। नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि हर सरकार की बात नहीं है यह औपचारिकता से भी हट कर बात है। 

कॉन्ट्रैक्ट खेती नई नहीं, दशकों से चली आ रही

इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि रामरतन का हलवा अगर नेता प्रतिपक्ष ने सभी सदस्यों को खिलाया होता तो संभवत: कॉन्ट्रैक्ट खेती के बारे में यह प्रश्न सदन में नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि नेता प्रपितक्ष के विधानसभा क्षेत्र में ही सहतवार कस्बे में यह सब होता है और वास्तव में यह दो पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर होता है। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट खेती कोई नई नहीं है। यह दशकों से चली आ रही है। पुराने समय में कोई कॉन्ट्रैक्ट, कोई लिखित दस्तावेज के आधार पर यह नहीं होता था। समय बदला, नई तकनीक आती गई। पहले लोग सादे कागज में लिखते थे। बड़े बुजुर्ग के सामने सारी बातें हो जाती थी। बाद में कागज के टुकड़े में लिखकर सहमति हो जाती थी। फिर स्टॉम्प पेपर पर यह होने लगा और अब ई स्टॉम्प पेपर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों से परम्परा चली आ रही है। किसी किसान की खेती नहीं ली गई है। लेकिन, किसान की आमदनी जरूर पड़ी है। उन्होंने कहा कि बैद्यनाथ ने बुन्देलखण्ड में ऐसे ही क्रांति का ढिंढोरा नहीं पीटा, जबकि इसका प्रचार होना चाहिए, जिससे अन्य लोगों की भी आमदनी को हम उसके साथ जोड़कर उसके लिए प्रेरित कर सके। 

किसानों को गुमराह करने का नहीं करें प्रयास  

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब किसानों की आमदनी को बढ़ाने की दिशा में प्रयास प्रारंभ हुआ है, तो उसको गुमराह करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट खेती को लेकर विकल्प दिया गया है। मर्जी है तो करिए, नहीं है तो मत कीजिए। लेकिन, इसके नाम पर किसी को निशाना बनाना अन्याय है। उन्होंने कहा कि यह किसानों के साथ देश के साथ अन्याय है। भारत के अन्नदाता किसानों को केन्द्र और प्रदेश की सरकार ने पूरा महत्व दिया है। हमारी सरकार जब आई तो हमने पहली कैबिनेट बैठक तब तक नहीं कि जब तक प्रदेश के अंदर लघु और सीमांत किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ करने की कार्य योजना नहीं बनी। उन्होंने कहा कि मंडियों के लिए वन नेशन वन मार्केट की व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। यह अपने आप में एक नया परिवर्तन है समय के साथ सब को जोड़ने का प्रयास है और कैसे हम किसानों के जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं यह कार्य मजबूती के साथ आगे बढ़ाए गए हैं।

बेहद प्रसिद्ध है रामरतन का गाजर का हलवा

रामरतन के गाजर के हलवा की दुकान 100 वर्ष से अधिक पुरानी है। हालांकि रामरतन का निधन हुए 60 साल ज्यादा समय गुजर गया है। लेकिन, उनके नाम से यह दुकान दूसरी तीसरी पीढ़ी चला रही है। मूल दुकान अब भी सहतवार बाजार में है। वहीं बाजार के अन्य हिस्सों में परिवार के सदस्यों की कई और दुकानें भी हैं। सीजन में हर रोज यहां एक कुंटल काला गाजर की खपत है, जिसके लिए आसपास के गांवों के किसानों से ही काली गाजर की खरीद होती है। नवम्बर से मार्च तक गाजर का हलवा बनता है। हलवा खाने कोलकाता, मुम्बई, दिल्ली, कानपुर समेत कई जगहों से लोग आते हैं।