शैलपुत्री की आराधना के साथ शुरू हुई नवरात्रि

  • Post By Admin on Oct 17 2020
शैलपुत्री की आराधना के साथ शुरू हुई नवरात्रि

बेगूसराय : कलश स्थापन के साथ ही शनिवार से मां भगवती दुर्गा की भक्ति कर शक्ति पाने का व्रत नवरात्र शुरू हो गया। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आयोजित पूजा में कहीं ध्वनि विस्तारक यंत्र आदि के प्रयोग नहीं किए जा रहे हैं। लेकिन दुर्गा मंदिर के अलावा घर-घर हो रही पूजा- अर्चना के कारण संपूर्ण वातावरण 'सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते' के महामंत्र से गुंजायमान हो गया है।नवरात्रि के पहले दिन लोगों ने कलश स्थापन और पूजन के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना की। इस मौके पर सुबह से जिला मुख्यालय बेगूसराय के शीतला स्थान, कर्पूरी स्थान, काली स्थान, सिद्ध शक्तिपीठ जयमंगला गढ़, बखरी पुरानी दुर्गा स्थान, भवानंदपुर दुर्गास्थान, लखनपुर दुर्गा स्थान समेत तमाम मंदिरों में लोगों की भीड़ लगी रही जहां पूजा- अर्चना कर लोगों ने सुख, समृद्धि और परिवार और देश के कल्याण के लिए मंगल कामना की।रविवार को मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ‘देवी ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा-अर्चना की जाएगी। मां ब्रह्मचारिणी के दाएं हाथ में माला और बाएं हाथ में कमंडल है। शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के यहां पुत्री बनकर जन्म लिया और महर्षि नारद के कहने पर अपने जीवन में भगवान महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक अपनी कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा।अपनी तपस्या की अवधि में इन्होंने कई वर्षों तक निराहार रहकर और अत्यन्त कठिन तप से महादेव को प्रसन्न कर लिया। इनके इसी रूप की पूजा और स्तवन दूसरी नवरात्रि पर की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा 'दधाना करपद्माभ्याम् अक्षमालाकमण्डलू, देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा' मंत्र से किया जाता है। जिसका अर्थ है कि जिनके एक हाथ में अक्षमाला है और दूसरे हाथ में कमण्डल है, ऐसी उत्तम ब्रह्मचारिणीरूपा मां दुर्गा मुझ पर कृपा करें।