मोदी-योगी ने विदेशी मेहमानों को ही बना दिया ब्रांड अम्बेसडर

  • Post By Admin on Oct 23 2021
मोदी-योगी ने विदेशी मेहमानों को ही बना दिया ब्रांड अम्बेसडर

कुशीनगर : बौद्ध स्थलों के विकास के बहाने कुशीनगर में शुरू हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुभारंभ में आये विदेशी मेहमान ही ''कालानमक चावल'' के ब्रांड अम्बेसडर बन गए हैं। उपहार के रूप में मिलने वाला भगवान ''बुद्ध का महाप्रसाद'' कालानमक चावल पाकर वे इतने गदगद हो गए कि अपने-अपने देशों में इसकी खेप भेजने की गुजारिश भी कर गए। अनजाने में वे कालानमक चावल की ब्रांडिंग कर रहे हैं। ''मोदी-योगी'' की जोड़ी ने कब उन्हें मुफ्त का ब्रांड अम्बेसडर बना लिया, पता ही नहीं चल सका। माना जा रहा है कि जिन विदेशी मेहमानों ने कालानमक चावल के स्वाद को चख लिया है, अब वे अपने-अपने देशों में न सिर्फ भगवान बुद्ध के महाप्रसाद को चखने व उसकी महिमा का गुणगान करेंगे, बल्कि उसकी ब्रांडिंग की वजह भी बनेंगे।

कुशीनगर महापरिनिर्वाण मंदिर में पीएम की मौजूदगी में हुए अभिधम्म दिवस समारोह में प्रसाद वितरण के दौरान न सिर्फ श्रीलंका से आए बौद्ध भिक्षुओं को कालानमक चावल का उपहार दिया गया बल्कि विभिन्न देशों के राजनयिकों को भी भेंट किया गया। ''योगी'' की अगुवाई वाली राज्य सरकार की तरफ से ‘बुद्ध के महाप्रसाद कालानमक चावल’ को पाकर पुलकित होने वाले इन विदेशी मेहमानों को ''मोदी'' की अगुवाई वाली भारत सरकार द्वारा उद्घाटित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के शुभारंभ समारोह में आमंत्रित कर एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस ब्रांडिंग की योजना पर काम होना बताया जा रहा है।
200 बौद्ध भिक्षुओं और राजनयिकों को उपहार
वरिष्ठ पत्रकार राजीवदत्त पांडेय का कहना है कि कालानमक चावल का उपहार कई मायनों में महत्वपूर्ण है। समारोह में लगभग 200 बौद्ध भिक्षुओं और राजनयिकों को यह उपहार दिया गया। श्रीलंका, म्यांमार, कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, थाईलैंड, भूटान, दक्षिण कोरिया के राजदूत व मंगोलिया, सिंगापुर, जापान, नेपाल आदि देशों के वरिष्ठ राजनयिक व विशिष्टजनों को उपहार देकर कालानमक चावल का गिफ्ट हैम्पर देकर एक तरह से उसकी ब्रांडिंग हुई। अनजाने में इन देशों के मेहमानों ने कालानमक चावल के ब्रांड अम्बेसडर के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। कुछ ही वर्षों में इसके सकारात्मक परिणाम होने वाली डिमांड के रूप में दिखने लगेगी।

इधर, कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी ने लाओस के राजदूत बूनेम चाउअंगल, कंबोडिया राजदूत उंग सेयन और म्यांमार के राजदूत मो चाव आउंग से मिलकर ‘बुद्ध का महाप्रसाद’ दिया है। इससे कृषि विशेषज्ञों और सरकार की कोशिशों को परवान चढ़ते देर नहीं लगेगी। इतना ही नहीं, बौद्ध देशों में भगवान बुद्ध से भावनात्मक और श्रद्धा रूपी जुड़ाव भी इसके मार्केटिंग को बूम करेगा। लगभग हर बुद्ध अनुयायी इस महाप्रसाद को चखने की कोशिश करेगा और अच्छा दाम देगा।
इसलिए है बुद्ध का महाप्रसाद

मान्यता है कि कालानमक चावल से बनी खीर को ग्रहण कर भगवान बुद्ध ने अपना उपवास तोड़ा था। इसे अपने शिष्यों को प्रसाद रूप में दिया था। तभी से इस चावल को बुद्ध का महाप्रसाद कहा जाने लगा। अब भी इस महाप्रसाद के लिए बुद्ध अनुयायी लालायित रहते हैं।