महाअष्टमी पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

  • Post By Admin on Oct 13 2021
महाअष्टमी पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

लखीसराय: शारदीय नवरात्र के तहत जिले में आस्था का केन्द्र जगदम्बा स्थान बना हुआ है। जहां कि दर्शन व पूजा-अर्चना को लेकर मां वैष्णो देवी की तरह दूर-दराज के श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। बुधवार को महाअष्टमी पर प्रातः कालीन से ही श्रीधर ओझा जी द्वारा पाल वंश के समय स्थापित मां वाला त्रिपुर सुंदरी माता मंदिर में श्रद्धालुओं ने मां वाला त्रिपुर सुंदरी माता, महाकाली माता, महालक्ष्मी माता, महासरस्वती माता पिंडियों का दर्शन व पूजा-अर्चना किया। व्यवस्थापक एवं जिला प्रशासन की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था में महिला, पुरुष अलग-अलग पूजा-अर्चना करते नजर आए। जबकि हजारों श्रद्धालुओं ने काॅलेज घाट में गंगा स्नान कर जगदम्बा स्थान तक एक किलोमीटर का कष्टी देकर पूजा अर्चना कर मनौती मांगी।

शाम में जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह एवं एसपी सुशील कुमार सपरिवार के साथ पूजन कर जिले में सद्भाव और शांति का प्रार्थना करेंगे। जबकि कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा फुलों की सजावट को लेकर आसपास इलाकों का दो रोज़ से आर्कषण केन्द्र बिन्दु मंदिर मना हुआ है। इसे देखने के लिए भी श्रद्धालु भक्तगण पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मंदिर और घरों में माता भक्तों द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ किए जाने से शाक्तिधाम बड़हिया भक्तिमय हुआ जान पड़ रहा है। मध्य रात्रि में बाईस पूजा पंडालों में विद्वान पंडितों के मंत्रोच्चारण के बाद श्रद्धालुओं के लिए मां का पट खोल दिया गया।

श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व शर्बत की व्यवस्था 

सूर्यगढ़ा प्रखण्ड मुख्यालय स्थित बड़ी दुर्गा स्थान के समीप सूर्यगढ़ा डाक बम सेवा समिति द्वारा महाष्टमी के शुभ अवसर पर शुद्ध शीतल पेय जल और शरबत की उत्तम व्यवस्था की गई है। समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल, सदस्य सह चैम्बर आफ कामर्स सूर्यगढ़ा इकाई के अध्यक्ष आलोक अग्रवाल, कैलाश प्रसाद, सुनील अग्रवाल, विष्णु लुहारुका आदि ने इस अवसर पर अपनी सेवाएं प्रस्तुत की। इसके पूर्व गन्दगी को बुहार कर साफ़-सफाई की गई। प्रकाश की उत्तम व्यवस्था की गई है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कार्यकर्ताओं को सक्रिय देखा गया। उधर विधि-व्यवस्था को बहाल रखने के लिए सूर्यगढ़ा पुलिस बल को जगह-जगह तैनात देखा गया जबकि एसएचओ चन्दन कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल द्वारा यातायात व्यवस्था समेत लोगों की सुरक्षा को लेकर गश्त तेज किया गया।

शक्ति की आराधना में डूबा शहर

पूरा शहर मां की आराधना में डूबा हुआ है। हर जगह ढाक की धुन और दुर्गा सप्तशती का मंत्रोच्चार, शंख ध्वनि सुनाई पड़ रही है। पूजा पंडाल में मां के दर्शन करने श्रद्धालु भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। हर कोई मां की प्रतिमा के साथ सेल्फी ले रहे हैं। लोग काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। मेले में बच्चे ज्यादा नजर आ रहे हैं। बुधवार को मां की आठवीं विभूति महागौरी की पूजा की गई। आचार्य पंडित महेन्द्र पाण्डेय कहते हैं कि नवरात्र के सातवें दिन कालरात्रि (काली) की पूजा होती है क्योंकि काली ही भगवान शिव के व्यंग्य से दुखी होकर माता गौरी बन गई। इसलिए कालरात्रि की पूजा के बाद मां गौरी की पूजा की जाती है। माता गौरी को शिवा, उमा और पार्वती के नाम से जाना जाता है। पार्वती पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री सती थी। जिनका विवाह भगवान शिव से हुआ था। दक्ष द्वारा शिव का अपमान किये जाने के कारण सती ने दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ के हवन कुंड में आत्मदाह कर लिया। सती का अगला जन्म हिमाचल की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ। पार्वती ने पुनः शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। कठोर तप के कारण शरीर काला पड़ गया। तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने पुनः पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। एक बार इन्द्र लोक पर असुर राज शुंभ-निशुंभ आक्रमण कर स्वर्ग से देवताओं को खदेड़ दिया। शिवजी को पता था कि पार्वती ही देवताओं को कष्ट से मुक्त कर सकती हैं। इसलिए एक दिन शिवजी ने पार्वती पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आप काली हैं। माता पार्वती को यह बात चुभ गयी। उन्होंने गंगा स्नान कर गौर वर्ण धारण किया। इस क्रम में उनके शरीर से श्यामल वर्ण कौशिकी प्रकट हुई। माता पार्वती की आज्ञा से देवी कौशिकी ने शुंभ और निशुंभ का वध कर दिया।