लखीसराय जिला स्थापना दिवस पर पौधारोपण कार्यक्रम

  • Post By Admin on Jul 04 2022
लखीसराय जिला स्थापना दिवस पर पौधारोपण कार्यक्रम

लखीसराय : पर्यावरण संरक्षण गतिविधि द्वारा लखीसराय जिला के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर चानन प्रखंड के बिछवे गांव में देव वृक्ष पीपल का पौधारोपण किया गया। पौधारोपण कार्यक्रम के शुभ अवसर पर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के प्रांत संयोजक, पर्यावरण भारती के संस्थापक एवं अखिल भारतीय पेड़ प्रकल्प टोली सदस्य राम बिलास शान्डिल्य ने बताया कि 3 जुलाई 1994 को बिहार राज्य में लखीसराय एक नए जिला के रूप में अस्तित्व में आया था। इसके पहले यह मुंगेर जिला का एक अनुमंडल था। लखीसराय पाल वंश के समय एक प्रतिष्ठित धार्मिक केन्द्र था। बौद्ध साहित्य में लखीसराय को अंगुतरी के नाम से जाना जाता था। इसका अर्थ है "जिला"। प्राचीन काल या महाभारत काल में लखीसराय अंग प्रदेश का सीमांत क्षेत्र था। पाल वंश के समय यह कुछ समय के लिए राजधानी भी रह चुका है।

2011 की जनगणना के अनुसार लखीसराय जिला की आबादी 10 लाख 912 थी। लखीसराय शहर किउल नदी किनारे बसा हुआ है। 1947 में  भारत विभाजन के पश्चात सिक्ख बन्धु लखीसराय शहर में आए। किउल नदी में मीठे जल होने के कारण रेलवे लाईन के दक्षिण में बस गए। आज पंजाबी मुहल्ला के नाम से विख्यात है। उनका एक पवित्र गुरूद्वारा भी वहाँ है। लखीसराय बौद्ध साधु संतों का केन्द्र बिन्दु रहा है। आज लाल पहाड़ी पर खुदाई के दौरान बौद्ध कालीन अवशेष मिले हैं। लखीसराय व्यावसायिक केन्द्र रहा है। राजस्थान से आकर स्व. चिरंजीवी ड्रोलिया ने रंग, अबीर, गुलाल के कारखाने लगाए। आज भी यह उद्योग जीवित है।

लखीसराय जिला स्थापना दिवस पर देव वृक्ष पीपल का पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ स्मरणीय कार्य है। आम नागरिक वर्षा ऋतु में घरों के आसपास पौधारोपण कर पर्यावरण संकट को दूर करने में सहभागी बनें। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के पौधारोपण कार्यक्रम में राकेश कुमार महतो, अमरेंद्र कुमार, आयूष कुमार, मनीष कुमार, रौनक कुमार, शिवम कुमार, प्रीतम कुमार, छोटू कुमार इत्यादि ने भाग लिए।