सामूहिक हत्याकांड में दस आरोपियों को आजीवन कारावास

  • Post By Admin on Apr 30 2022
सामूहिक हत्याकांड में दस आरोपियों को आजीवन कारावास

हमीरपुर : 12 वर्ष पूर्व एक परिवार के दंपती सहित चार मासूमों की धारदार हथियार से काटकर सामूहिक हत्या करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी द्वितीय सुनीता शर्मा की अदालत ने दस आरोपियों को आजीवन कारावास व दस-दस हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा के साथ समायोजित करने का आदेश दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश शुक्ला, अशोक शुक्ला व प्रवीन भदौरिया ने बताया कि ललपुरा थानाक्षेत्र के मोराकांदर गांव निवासी पीड़ित भाई अमर सिंह ने 27 फरवरी 2010 को पुलिस को दी तहरीर में बताया कि मृतक जगदीश ने अपनी करीब सात बीघा जमीन का बैनामा आरोपी गौरीशंकर को किया था, जिस पर जगदीश की पत्नी बृजलता ने तहसीलदार के यहां आपत्ति लगा दी थी। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने दोनों पक्षों के 13 लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की थी।
पीड़ित भाई ने पुलिस को बताया कि 25/26 फरवरी 2010 की रात उसके भाई जगदीश के घर में चीख पुकार व बचाओ बचाओ की आवाज आ रही थी। जिस पर वह व भाभी शीला ने लालटेन व इमरजेंसी रोशनी में देखा कि गांव निवासी के आरोपी गौरीशंकर माली उनके पुत्र सत्ते उर्फ सत्यप्रकाश व प्रेम प्रकाश, कामता प्रसाद व उसका भाई ओमप्रकाश और चचेरे भाई धनंजय सिंह, अमित द्विवेदी व उसका भाई सुमित कुमार तथा चचेरे भाई आशीष द्विवेदी व संतोष भुर्जी कुल्हाड़ी, फरसा, चाकू आदि से बृजलता (40), अभय प्रताप सिंह (13), आकांक्षा (10), अजय प्रताप सिंह (6), गुल्लू उर्फ गुड्डू (3) को मार रहे थे। वहीं मृतक जगदीश सिंह (42) को आरोपी ओमप्रकाश, संतोष, कामता सिंह पकड़े थे। गाली देते कह रहे थे कि रुपये तो लिए अब दाखिल खारिज भी नहीं होने दे रहे हो और सभी लोग उसके भाई को पकड़कर अपने साथ ले गए।
बताया कि जगदीश, उसकी पत्नी बृजलता, पुत्र अजय प्रताप व अभय प्रताप व तीन वर्ष के गुड्डा उर्फ गुड्डू तथा बेटी आकांक्षा की धारदार हथियार से सामूहिक हत्या कर दी। तभी से आरोपी जेल में निरुद्ध हैं। किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिली है। विवेचक संजय सिंह ने आरोपी सत्यप्रकाश उर्फ सत्ते व प्रेमप्रकाश को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर मृतक जगदीश का शव बेतवा नदी के रेत पर उस पार कंडौर गांव से बरामद किया था।
10 मई 2009 में कराया था जमीन का बैनामा
पीड़ित अमर सिंह ने बताया कि उसके भाई जगदीश को 10 मई 2009 को आरोपी सत्यप्रकाश, प्रेम प्रकाश व उसके सहयोगी बहला फुसलाकर शराब के नशे में घर से ले गए थे। 12 मई को मीरा पत्नी सत्यप्रकाश, जयश्री पत्नी प्रेमप्रकाश के पक्ष में सात बीघा जमीन का बैनामा करवा लिया था। मृतक की पत्नी बृजलता को जानकारी होने पर दाखिल खारिज की कार्यवाही में तहसीलदार के यहां आपत्ति लगाई थी। बताया कि उसने व उसके भाई सभाजीत ने भी आपत्ति लगाई थी। आरोपियों ने धमकी दी कि आपत्ति वापस नहीं ली तो सभी को जान से मार देंगे।
पुलिस ने की थी शांतिभंग की कार्रवाई
मृतक जगदीश व उसकी पत्नी ने पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी खेत पर कब्जा करने लगे तब फिर दोनों पुलिस के पास गए, पुलिस ने बाद में शांतिभंग पर दोनों पक्षों के 13 लोगों पर कार्रवाई कर पाबंद कर दिया था।
अभियोजन पक्ष ने की फांसी की मांग
अभियोजन पक्ष के शासकीय अधिवक्ता राजेश शुक्ला, अशोक शुक्ला व प्रवीन भदौरिया ने अदालत से इस नरसंहार मामले में अभियुक्तों को फांसी देने की मांग की, लेकिन अदालत ने सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।