बिहार STET अभ्यर्थियों ने फिर उठाई ट्विटर पर रिजल्ट की माँग

  • Post By Admin on Aug 01 2020
बिहार STET अभ्यर्थियों ने फिर उठाई ट्विटर पर रिजल्ट की माँग

पटना: बिहार STET अभ्यर्थी लगातार परीक्षा परिणाम प्रकाशन की माँग विभिन्न मंचों से करते रहे हैं। 31 जुलाई की रात भी STET अभ्यर्थियों ने ट्विटर के जरिए परीक्षा परिणाम घोषित करने की माँग की, जो कि अकारण बोर्ड द्वारा रद्द किया गया है। अभ्यर्थियों की यह ट्विटर मुहिम बेहद सफल रही व भारतवर्ष में यह छठे स्थान तथा बिहार में दूसरे स्थान पर ट्रेंड करता रहा। ट्विटर में अभ्यर्थियों ने वोट को लेकर सरकार को घेरा। ट्विटर का हैशटैग था, "बिहार_STET_रिजल्ट_नहीं_तो_वोट_नहीं"। छात्रों ने अपने ट्वीट में परीक्षा के बाद के बीएसईबी अध्यक्ष का बयान भी टैग किया जिसमें उन्होंने साफ सुथरी परीक्षा की बात कही थी। साथ ही इस परीक्षा में जैमर लगा था व जूते-चप्पल के साथ आना वर्जित था। STET की परीक्षा 28 जनवरी को 2 पालियों में आयोजित हुई थी। मगर चार सेंटरों पर छात्रों के तोड़फोड़ के कारण इन चार केंद्रों की परीक्षा 26 फरवरी को पटना में आयोजित हुई। दोनों ही परीक्षाएँ साफसुथरी रहीं तथा उत्तर-कुँजी भी जारी कर दी गई। जिस दिन परीक्षा का रिजल्ट आना था, उस दिन परीक्षा रद्द कर दी गई। अकारण परीक्षा रद्द करने के विरोध में पटना उच्च न्यायालय में छात्रों ने मुकदमा भी दर्ज किया। पटना उच्च न्यायालय ने भी बोर्ड को दोनों ही परीक्षाओं के ओएमआर शीट को नष्ट करने से मना किया है। फिलहाल 6 अगस्त तक उच्च-न्यायालय के ग्रीष्मकालीन अवकाश का दौर है।

सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार जबतक किसी परीक्षा में 10% कदाचार साबित नहीं होता, तबतक उस परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता। बिहार बोर्ड (BSEB) कोर्ट में कोई दलील देने से पहले ही हाथ खड़ी कर चुकी है तथा महाधिवक्ता (AG) लगातार तारीखों में अनुपस्थित रहे हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट पर भी सरकार का दबाव है तथा महाधिवक्ता को जानबूझकर अनुपस्थित कर तारीख-पर-तारीख ली जा रही। छात्रों ने STET रिजल्ट के प्रकाशन हेतु कई आंदोलन भी किए, विधायकों व मंत्रियों को अर्जियाँ डाली मगर कोई जनप्रतिनिधि सुनने को तैयार नहीं। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि इस षड्यंत्र में बड़े नेताओं व शिक्षा माफियाओं का हाथ है क्योंकि इस परीक्षा में सीट बिक्री न हो सकी व इनकी कमाई न हो सकी। अतः छात्र लगातार शिक्षा माफियाओं व इस प्रकार के नेताओं से शिक्षा को बचाने हेतु माँग कर रहे हैं। सरकार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है व ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार को छात्रों के भविष्य व शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं। केंद्रसरकार की एक रिपोर्ट में बिहार की माध्यमिक शिक्षा की खस्ता हालत पहले से ही बताई गई है। शिक्षकों के लाखों पद रिक्त रहने के बावजूद यहाँ बहाली नहीं हो पा रही। ऐसे में सचमुच सूबे में शिक्षा, शिक्षक व छात्रों का भविष्य अंधकारमय है।

छात्रों ने यह भी कहा है कि सरकार यदि आर्थिक मंदी से गुजर रही तो वे 1 वर्ष का वेतन नहीं लेंगे व बिना वेतन के सेवा देंगे।साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार CBI जाँच करवा ले या जो अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्र हैं, केवल उनकी पुनर्परीक्षा करवा ले या उनका साक्षात्कार करवा ले। मगर सरकार की मंशा कुछ और ही जान पड़ती है। बोर्ड द्वारा लगातार पुनर्परीक्षा की विज्ञप्ति अखबारों में जारी की जा रही है, जबकि इस कोरोना-काल में कोई परीक्षा सम्भव नहीं है। छात्रों का कहना है कि सरकार अपने चुनाव समय से करवा लेती है मगर नौकरी देने में इन्हें 12-15 वर्ष से कम नहीं लगते। विदित हो तो बिहार STET की परीक्षा 2011 के बाद 2020 में आयोजित की गई थी। इतने लंबे अंतराल के बाद परीक्षा लिए जाने के बावजूद भी इस परीक्षा पर संकट के बादल थोपे गए, ऐसा छात्रों का कहना है।

अभ्यर्थी अपने स्तर से पूर्ण कोशिश में हैं कि सरकार पुनर्विचार कर परीक्षा का परिणाम अतिशीघ्र घोषित करवाए ताकि बिहार के मेधावी-गरीब छात्रों, शिक्षा के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। देखने की बात यह है कि शिक्षा के प्रति कान में तेल डालकर सोयी सरकार जग पाती है या नहीं, यह अभी भी भविष्य के गर्भ में है। 31 जुलाई की रात हुए ट्विटर अभियान में बिहार STET अभ्यर्थियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। बिहार प्राथमिक (1-8) शिक्षक नियोजन वाले छात्रों का भी इसमें भरपूर साथ मिला क्योंकि STET नियोजन से उनके भी चयन की संभावना अधिक रहेगी। ऐसा इसलिए कि STET नियोजन होने से प्राथमिक में मेधा-भीड़ कम होगी।

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा है कि 15 साल की सत्ता पाकर माननीय मुख्यमंत्री अभिमानी हो गए हैं व मदान्धता की स्थिति में है। उन्हें सही-गलत दिख ही नहीं रहा। चाणक्य ट्यूटोरियल के निदेशक ने कहा कि-
"जुल्म का सूरज लाख उगे, शाम को आखिर ढलता है.."

उन्होंने दुष्यंत कुमार की पंक्तियों को भी याद किया-
"सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।"

इस ट्विटर अभियान में आनंद झा, सुमित कुमार, आलोक कुमार श्रीवास्तव, सत्य प्रकाश, विपुल विक्रम, नितेश, नवीन, राकेश, प्रशांत, पवन, अवधेश, रूही, करिश्मा प्रियदर्शिनी, सिंधु, निरंजन पाण्डेय, अमन, गौतम, कुमुद रंजन, तमन्ना प्रकाश, पूजा, काजल, सोनू कुमार सोनी, करण कश्यप, केशव झा, राहुल, विश्वजीत, गोलू, अजय कुमार, नंदिनी पाण्डेय, मोनी, आरती कुमारी, बबिता कुमारी, शांतिनिकेतन, मुजफ्फरपुर के प्रिंसिपल संजीव कुमार, प्रदीप, अमित, नवनीत, दिव्य प्रकाश, गुड्डू, विपुल विक्रम, जितू , शनिकेत, नेहा, स्वर्ण लता, अजर प्रवीण, फ़ैयाज़ वारिस, कुमार अभिनव, निकी, ज़ोया सदफ, कविता, नीरज, पंकज, रिंकी, ममता, कल्पना, अंकित, राखी रंजन, दिगंबर नाथ मिश्रा जैसे हजारों की संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। अभ्यर्थियों को न्यायतंत्र व सरकार से यह आशा है कि उनकी बात सुनी जाएगी व उन्हें इंसाफ मिलेगा तथा STET का परिणाम जल्द प्रकाशित होगा।

✍️ सत्य प्रकाश