बढ़ता ही जा रहा है कोरोना का दायरा

  • Post By Admin on Aug 01 2020
बढ़ता ही जा रहा है कोरोना का दायरा

लखीसराय: वैश्विक महामारी कोरोना का दायरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जिले में इसके पाॅजिटीव हर दिन दर्जनों की संख्या में बढ़ते हुई मिल रहे है। सबसे अधिक हैरान करने वाली बात तो यह है कि इससे मिलते-जुलते लक्षणों के चलते बाकी अन्य बीमारियों के मरीज भी अस्पतालों से समुचित ईलाज की सुविधा ले पाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में यह कहना बिल्कुल अतिश्योक्ति नहीं होगा कि स्थिति और अधिक भयावह होने वाली प्रतीत होती है।

चिकित्सक चाहे सरकारी अस्पतालों में हो या फिर निजी चिकित्सालयों में, उनका हाल कुछ ऐसा हो चला है कि वे जान बूझकर ईलाज करने से परहेज इसलिए करते नजर आ रहे है क्योंकि यदि उन्होंने कोरोना के ही सिर्फ मरीजों का ईलाज करना यदि शुरू भी कर दिया तो उनकी मदद में कार्यरत उनके दूसरे सहयोगी व अन्य कर्मी ना कहीं हाथ खड़े कर भाग निकले, इस डर से वे भी सरकार के हर कदम का तमाशबीन और मूकदर्शक बनकर इंतजार करते नजर आ रहे हैं। इधर मरीजों का हाल यह है कि वो पुनः झोलाछाप चिकित्सकों, ओझा-गुणी व झाड़-फूंक के अलावा होमियोपैथिक सहित आयुर्वेद व अन्य परम्परागत औषधियों पर आश्रित हो चले हैं। कई मरीज तो फोन पर ही चिकित्सक से सलाह लेकर दुकान से दवा खरीद कर सेवन करते नजर आ रहे है। जबकि इस कोरोना काल में कई दवा दुकानदार तक पहुंचकर ही अपने मरीज को दुकानदार से पूछकर ही दवा देकर वापस घर लौटने में ही भलाई महसूस करते दिखाई रहे है।

सर्वाधिक बुरा हाल ईमरजेंसी वाले मरीजों का है, जो अपनी मौत कम कोरोना काल में ईलाज के अभाववश जान गंवा रहे है, वह भी कोरोना के ही नाम के साथ,भले ही दूसरे अन्य कारणों से उनकी मौते क्यों न हुई हो, परंतु इन दिनों लोगों की नजरों में सभी बस कोरोना की ही भेंट चढ़ते नजर आ रहे है। सब राम भरोसे हो चला है। ताज्जुब तो यह देखकर हो रहा है कि ईलाज के अभाव में भी मरने के बाद, कोरोना के चलते समाज का हाल ऐसा है कि कोई खांसते-छींकते हुए हर मरते हुए को जीवन रूपी पानी तक देने से परहेज बरत रहा है।