आज भी यहा जिसकी लाठी उसी की भैस का कानून है काबिज

  • Post By Admin on Sep 16 2020
आज भी यहा जिसकी लाठी उसी की भैस का कानून है काबिज

बक्सर : बिहार-उत्तरप्रदेशी के सीमावर्ती क्षेत्र के दियारा भूभाग पर बसा गांव नवरंगा एवं जवही अपनी भगौलिक स्थिति को लेकर इस कदर बदनाम या मसहुर है कि आज भी यहा जिसकी लाठी उसी की भैस का कानून काबिज है | ऐसा नही की आजाद भारत की कानून व्यवस्था धरातल पर काम नही करती या लागू नही है | यहा सब कुछ है राज्य सरकारों की अपनी पुलिस व्यवस्था है, राज्यों के बीच सीमा का निर्धारण भी है | सीमा परिसीमन की भूल को लेकर यहा के स्थानीय बिहार-यूपी के लोग वर्षो से एक दूसरे के जानी दुश्मन की भूमिका में है | पहली बात तो यह की नवरंगा और जवही समेत सात गाँव की संरचना गंगा कटाव के कारण इस कदर बदल चुकी है कि गांवो की आधी आबादी बिहार में है तो आधी आबादी यूपी के जद में है | इस स्थिति को लेकर कभी कभी तो कानून व्यवस्था के नामपर दोनों ही राज्यों की पुलिस उहापोह की स्थिति में होती है | इन दिनों बिहार में पूर्ण शराब बंदी कानून लागू होने को लेकर दोनों ही राज्यों के सीमावर्ती इन गांवो में दिलचस्प नजारा देखा जा सकता है | बिहार-यूपी सीमा परिसीमन के नामपर महज बारह फीट सडक का निर्धारण है | जहा बिहार में पूर्ण शराब बंदी है वही यूपी में शराब बंदी कानून लागू नही है| जाम से जाम टकराने के लिए बिहार के लोगो को महज एक अदद सडक को पार करना होता है | कारण है कि इन दिनों बिहार का यह दियारा ईलाका ऐसगाहो का एक उपयुक्त ठौरठिकाना बन गया है दिलचस्प यह की महज बारह फीट की सडक के एक तरफ बिहार सरकार द्वारा पूर्ण शराब बंदी और शराब की लत जानलेवा है जैसे बैनर बोर्ड व् दीवाल पेंटिंग के कार्य किए गए है वही सडक के दूसरी ओर यूपी की सीमा में आइए शराब हम आपका स्वागत करते है जैसी स्थिति है | कभी कभी तो कुछ अपराधिक वारदातो को लेकर भी बिहार-यूपी की पुलिस आपस में ही उलझते रहती है |

सूत्रों की माने तो बिहार यूपी का यह दियारा इलाका शराब तस्करों के लिए महफूज ठिकाना है उपर से गंगा नदी यहा सोने पर सुहागा की कहावत को चरितार्थ कर रही है | इन दिनों कई सफेद पोश लोग व बाहुबली इन्ही दियरा के इलाको से कभी सडक मार्ग तो कभी गंगा नदी का सहारा लेकर बड़ी मात्रा में शराब की तस्करी को अंजाम दे रहे है |

इस बाबत पूछे जाने पर आवकारी विभाग समेत जिला प्रशासन (बिहार) के अधिकारी संसाधनों की कमी फ़ोर्स की संख्या की बात कहकर अपना पल्ला झाड लेते है | वास्तविकता भी है, दियरा का यह ईलाका गंगा की गाद से भरी होती है जहा वाहनों का प्रयोग नही किया जाता पुलिस की मजबूरी है पैदल गस्त करना ,जब की शराब माफिया तरह तरह के आधुनिक सुविधा से लैस है | सूत्रों की माने तो यहा जुगाड़ टेक्नोलोजी का प्रयोग कर नाव को मोटर बोट  बना दिया गया है पुलिस द्विश के हालात में तस्कर इन्ही वोटो से निकल जाते है या फिर पकड़े जाने की स्थिति में शराब को गंगा में डुबो देते है |

शराब बंदी कानून को लेकर ऐसा नही है कि बिहार सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है| बाकायदा नवरंगा व जवही समेत बिहार की सीमा के अंतर्गत बिहार पुलिस का एक पुलिस पिकेट भी स्थापित है | पर यह सब कोरम पूरा करने के लिए ही है | इस पिकेट अपने मूल मकसद से इतर पैसे उगाही का मात्र जरिया बन गया है |

आधिकारिक सूत्रों की माने तो बिहार सरकार शराब बंदी कानून को लेकर यूपी की सरकार से तीन किलोमीटर के दायरे में कोई भी शराब की दुकाने ना खोलने का आग्रह कर चुकी है पर यूपी सरकार राजश्व को लेकर इसकी अवहेलना करते आ रही है | अब जब की बिहार विधान सभा चुनाव होने को है ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा की बक्सर में शराब तस्करी के इस कमजोर कड़ी व भयावह रास्ते को सील करने में बक्सर पुलिस प्रशासन आवकारी प्रशासन और जिला प्रशासन क्या रणनीति अख्तियार करता है ।