प्रशासनिक असहयोग व राजनीतिक असंवेदना के कारण नहीं लड़ेंगे चुनाव : डॉ. पंकज

  • Post By Admin on Oct 18 2020
प्रशासनिक असहयोग व राजनीतिक असंवेदना के कारण नहीं लड़ेंगे चुनाव : डॉ. पंकज

मुजफ्फरपुर : शहीद खुदीराम बोस स्मारक पर जाने माने साहित्यकार और बेला पत्रिका के संपादक डॉ. संजय पंकज ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि "कोरोना, डेंगू और मलेरिया का मुजफ्फरपुर में प्रकोप बढ़ा हुआ है ऐसे वातावरण में चुनाव कहीं से उपयुक्त नहीं है। बिहार सरकार के दो-दो मंत्रियों की मृत्यु हो गई, आज भी पूर्णिया रेंज के आईजी कोरोनावायरस से काल के गाल में समा गए। चुनाव की घोषणा के साथ ही कोरोनावायरस से बचाव के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की घोषणा बार-बार प्रशासन करता है मगर उसकी धज्जियां उड़ रही है‌ भारतीय संस्कृति की आस्था में हमारे पर्व त्यौहार हैं मगर इस बार चुनाव प्रकरण में दुर्गापूजा पर भी पाबंदी है जबकि नामांकन के लिए सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ हजारों की भीड़ में नेता और प्रत्याशी आ रहे हैं, सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और मास्क का कोई भी प्रयोग नहीं कर रहा है । धन के प्रभाव से गांव-गांव तक बड़ी पार्टियां वर्चुअल रैली करेंगी, उनके कार्यकर्ता पिटारा लिए घर-घर पहुंच भी रहे हैं।"

बहुत ही दुखी मन से आगे बोलते हुए डॉ पंकज ने कहा कि राजनीतिक दलों की सिद्धांत हीनता से मुझे गहरा क्षोभ है । मुजफ्फरपुर में समस्याओं के अंबार को लेकर जब मैं शुभचिंतकों के दबाद में लोक उमीदवार के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई उसी वक्त से मेरे साथ प्रशासन का असहयोगात्मक रवैया शुरू हो गया । हमारे सांस्कृतिक जुलूस को शहर में निकलने की अनुमति नहीं दी गई जबकि बिना अनुमति के कई जुलूस इसी शहर में विभिन्न दलों के नेताओं ने निकाला । लेकिन उन पर कोई कानूनी कार्यवाई नहीं की गई । नुक्कड़ सभा के माध्यम से जनता तक पहुंचने की अनुमति मांगने पर प्रशासन ने चेतावनी देते हुए न करने की दलील दी । वहीं अन्य वर्चस्व वाले नेताओं के लिए सभी द्वार खोल दिए गए हैं । 

डॉ. पंकज ने कहा कि "इन सभी वजहों से मैं दुखी होकर चुनाव का बहिष्कार कर रहा हूं । चुनाव में उतरना मेरे लिए हार जीत का प्रश्न नहीं है बल्कि मेरा उद्देश्य नई राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत करना है। हमारी लड़ाई जारी रहेगी कुशासन और भ्रष्टाचार के विरोध में हम अपना अभियान आगे भी जारी रखेंगे व मुजफ्फरपुर को एक सांस्कृतिक पहचान दिलाने में कोई कसर न छोड़ेंगे ।" साथ ही उन्होंने कहा कि वो किसी दल या किसी व्यक्ति विशेष के विरोधी नहीं हैं बल्कि भ्रष्टाचार और सिद्धांतहीन राजनीति के विरोधी हैं। जिन मित्रों के सहयोग से जनता की आवाज बनने के लिए आगे आए , उनके प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि वे तब से लेकर आज तक हमारे साथ हैं और उन्हीं के सुझाव पर मैंने यह निर्णय लिया है। हमारा संकल्प अकेले लड़ने का नहीं है हम सबको साथ लेकर लड़ेंगे । हम व्यवस्था तथा मानसिकता के बदलाव के लिए लड़ रहे हैं । यह लड़ाई चलती रहेगी, चलती रहेगी । मुजफ्फरपुर देश की राजनीतिक संस्कृति को दिशा देगा । विश्वास है राजनीति सही दिशा में प्रस्थान करेगी तथा वह जनता के साथ ईमानदार और संवेदनशील रहेगी ‌अपने उद्गार व्यक्त करने वालों में डॉ यशवंत, मिशन भारती के संस्थापक अविनाश तिरंगा, नंदकिशोर निराला, प्रमोद आजाद, डॉ राकेश कुमार मिश्र ब्रज भूषण शर्मा, विक्की कुमार, विकास नारायण उपाध्याय, बिट्टू कुमार, प्रकाश कुमार, अनुराग आनंद ,सुमन वृक्ष, डॉ अरविंद, प्रेम रंजन, डॉ रामेश्वर द्विवेदी आदि विभिन्न सांस्कृतिक तथा सामाजिक संगठन के प्रबुद्ध लोग उपस्थित थे और सब ने एक स्वर में कहा कि हम संजय पंकज के नेतृत्व में सांस्कृतिक लड़ाई लड़ेंगे और पक्षपात की राजनीति तथा प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरोध में जन जागरूकता भी करते रहेंगे‌ पत्रकारों से पूछे जाने पर कि आप आगे कभी चुनाव लड़ेंगे या नहीं तो संजय पंकज ने कहा कि यह निर्णय जनता करेगी मैं अकेले नहीं हूं सबके साथ हूं और सबका साथ तथा जनता का संबल मिलेगा तो मैं हर कदम मौजूद रहूंगा। अभी का समय चुनाव के लिए तनिक भी उचित नहीं है अतः मैं जनता के साथ सहमत हूं और अभी चुनाव नहीं लडूंगा ।