साहित्य अपने समय का सच्चा इतिहास होता है : डा. सुधांशु कुमार

  • Post By Admin on Sep 19 2020
साहित्य अपने समय का सच्चा इतिहास होता है : डा. सुधांशु कुमार

साहित्य अपने समय का सच्चा इतिहास होता है । यदि किसी कालखंड का सच्चा इतिहास जानना हो तो उस वक्त के साहित्य का गहन अनुशीलन करना चाहिए क्योंकि सच्चा इतिहास जानने का सबसे ईमानदार माध्यम साहित्य है  । आजकल जिस प्रकार इतिहासकारों ने 'गैंग' बनाकर  राष्ट्र की गरिमा को धूमिल करने एवं अपने युवा शक्ति को बरगलाने के विदेशी एजेंडे को आगे बढ़ाने का कार्य किया हैं , यह चिंतनीय है । उक्त बातें सिमुलतला आवासीय विद्यालय में मनाए जा रहे आनलाइन हिन्दी पखवारा के छठे दिन कार्यक्रम के संयोजक व व्यंग्यकार डा. सुधांशु कुमार ने कही । उन्होंने बताया कि बिपन चंद जैसे इतिहासकारों ने इतिहास लेखन के माध्यम शहीदेआजम भगत सिंह , चन्द्रशेखर आजाद , सुभाषचंद्र बोस जैसे भारत माता के सच्चे बलिदानियों के लिए आतंकवादी शब्द का प्रयोग करके एवं विदेशी आक्रांताओं का महिमामंडन करके इतिहास लेखन के साथ खिलवाड़ किया है । यही कारण है कि आज पुनः इतिहास लेखन की आवश्यकता है । 

यह ज्ञात हो कि शुक्रवार को दसवीं कक्षा के छात्रों के बीच आनलाइन हिन्दी पखवारांतर्गत दोहा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गयी । इसमें छात्रों ने 'कृषक' और 'देश' विषय पर दोहे लिखे । इसे लिखने के लिए सभी को एक घंटा का समय दिया गया था । इसमे छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया । इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कशिश कृति , प्रशांत राज और सानू ने, द्वितीय स्थान किशोर कुमार, सुजीत कुमार और रिया राज ने एवं तृतीय स्थान चाल्सी ने पाया -

भारत की जो जान हैं , पर मिलता न सम्मान ।
कृषकों की इस भूमि पर , उनका ही अपमान ।।
           -- कशिश कृति

दुनिया का पालन करे , हैं वो लोग महान ।
माटी से सोना उगे , कहते जिसे किसान ।।
         -- प्रशांत राज

छटा चमकती ताज - सी , रंग- बिरंगे वेश ।
है जन्नत को देखना , आओ भारत देश ।।
   --- सानू

द्वितीय स्थान किशोर , सुजीत और रिया राज ने पाया

कर्ज लिया धनसेठ से , सींचा वह दिन रात ।
कर्जदार बनता गया , लगा न कुछ भी हाथ ।।
        - किशोर कुमार

कृषक कर्म को जो करे , होता वही किसान । 
धरती की सेवा करे , धरती का भगवान ।।
     - सुजीत

गाते हैं हम जोश से , देशभक्ति के गीत ।
देख हमारी भावना , अरि होवत भयभीत ।।
    --रिया राज

तृतीय स्थान चाल्सी ने पाया

जो किसान उपजात हैं , फसल यहां दिनरात ।
भूखमरी के आज वह , होते यहां शिकार ।।
       --चाल्सी

प्रथम , द्वितीय तथा तृतीय स्थान पाने वाले छात्रों के साथ सभी प्रतिभागियों  को विद्यालय के प्राचार्य डा. राजीव रंजन ने साधुवाद देते हुए कहा कि साहित्य के प्रति जागरूकता व्यक्ति में जिजीविषा जागृत करती है । जीवन को समग्रता में देखने व जीने की एक नवीन दृष्टि मिलती है । साहित्य के प्रति यह जागरूकता निःसंदेह ही समाज व राष्ट्र के साथ-साथ संपूर्ण मानवता के लिए एक शुभ संकेत है । उपप्राचार्य व शैक्षणिक प्रमुख सुनील कुमार ने भी सभी छात्रों के प्रति शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि साहित्य की समझ हममें संवेदना का संचार करती है , सच्चे अर्थों में हमें मनुष्य बनाती है । इसके अभाव में व्यक्ति संवेदनहीन पशुमात्र रह जाता है ।