हिन्दी संस्कार और संस्कृति की भाषा है : डा. सुधांशु कुमार

  • Post By Admin on Sep 17 2020
हिन्दी संस्कार और संस्कृति की भाषा है : डा. सुधांशु कुमार

हिन्दी संस्कार और संस्कृति की भाषा है । आज कार नहीं , संस्कार की जरूरत है जिसके बिना संतुलित जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती । उक्त बातें व्यंग्यकार डा. सुधांशु कुमार ने सिमुलतला आवासीय विद्यालय में मनाए जा रहे ऑनलाइन हिन्दी पखवाड़ा के अंतर्गत अपने वक्तव्य में कही । यह ज्ञात हो कि कोरोना के कारण विद्यालय में  महाकवि राम इकबाल सिंह राकेश साहित्य परिषद के अंतर्गत ऑनलाइन  हिन्दी पखवाड़ा मनाया जा रहा है । बुधवार को बारहवीं कक्षा के छात्रों के बीच आनलाइन दोहा  लेखक प्रतियोगिता आयोजित की गयी । इसमें 'कोरोना' विषय पर दोहा लिखने के लिए दिया गया जिसके लिए एक घंटा समय निर्धारित किया गया । इस निर्धारित समय में छात्रों ने दिए गए विषय से संबंधित छंद लिखकर प्रेषित किया । इसमें ज्योति कुमारी एवं कैलास कुमार ने सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन किया -

कोरोना को रोकना , बहुत हुआ अनिवार्य । 
मानव हित में है यही , सबसे बढकर कार्य ।।

जनता कर्फ्यू लगाइए, आगामी रविवार ।
कम हो पाएगा तभी , कोरोना का वार।।

विद्यालय के प्राचार्य डा. राजीव रंजन ने कहा कि भारत में हिन्दी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसमें देश को एक सूत्र में बांध कर रखने की सामर्थ्य है । वहीं उप प्राचार्य सुनील कुमार ने कहा कि साहित्य का सम्यक ज्ञान सम्यक जीवन की एक नवीन दृष्टि देता है जिसके अभाव में समाज में असंतुलन उत्पन्न होता है । 
कार्यक्रम के संयोजक डा. सुधांशु कुमार ने बताया कि अगली प्रतियोगिता वृहस्पतिवार को ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों के बीच सोरठा लेखन की होगी ।