छंद भाव मुक्ति का साधन है : डॉ. सुधांशु कुमार

  • Post By Admin on Sep 20 2020
छंद भाव मुक्ति का साधन है : डॉ. सुधांशु कुमार

छंद ही भाव मुक्ति का सशक्त साधन और कविता का प्राणतत्व है। इसी के कारण हजारों वर्षों की यात्रा तय करके सनातन वैज्ञानिक संस्कृति का संवाहक वेद हमारे बीच विद्यमान है इसीलिए पाणिनी ने छंद को वेद पुरुष का पैर कहते हुए लिखा है -  

छंदः पादौ तु वेदस्य हस्तौकल्पो$थपठ्यते ।
  ज्योतिषामयनं चक्षु निरुक्तं श्रोत्रमुच्यते ।।
  शिक्षाप्राणस्तुवेदस्य मुखं तु व्याकरणं स्मृतं । 
  तस्मात् सांगमधीत्यैव ब्रह्मलोके महीयते ।।

पाणिनीय शिक्षा में वेदांगों के महत्व को निरूपित करते हुए छंद को वेद पुरुष का पैर, कल्प को हाथ, ज्योतिष को नेत्र, निरुक्त को कान, शिक्षा को प्राण और व्याकरण को मुख कहा गया है। अतः जो वेदांगों का अध्ययन करने के उपरांत वेदाध्ययन करता है, वही ब्रह्मत्व को जानता है। जिस प्रकार मानव की मानवीयता शिक्षा, उसके अंगों एवं उत्तम स्वभाव के कारण होती है, उसी प्रकार वेदांगों के अध्ययन के अभाव में वैदिक तत्वों का अवगमन सर्वथा असंभव है। उक्त बातें सिमुलतला आवासीय विद्यालय में आनलाइन छंद (सोरठा और दोहा) लेखन प्रतियोगिता के सातवें दिन विद्यालय के भाषा शिक्षक व्यंग्यकार डॉ. सुधांशु कुमार ने अपने वक्तव्य में कही। शनिवार को नौवीं कक्षा के छात्रों के बीच आनलाइन छंद लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें उन्हें 'माता' और 'अनुशासन' विषय पर छंद लिखने के लिए दिया गया जिसे छात्रों ने निर्धारित समय में लिखा। इसमें प्रथम स्थान राजनंदिनी, साक्षी कुमारी एवं खुशी कुमारी, द्वितीय स्थान आर्या एवं तृतीय स्थान तनु प्रिया ने पाया।

प्रथम स्थान -

कितने ही आये-गये, धरती पर  इनसान।
अनुशासन में जो रहे, बनते वही महान।।
               -राजनंदिनी

माँ की कदर जो न करे, कमा रहा वह पाप । 
माँ का मूल्य उसे पता, खो बैठा जो आप ।।
          -साक्षी कुमारी

माँ जैसा कोई नहीं, देती इतना प्यार ।
जीवन में सकता नहीं, कोई कर्ज उतार ।।
   -खुशी कुमारी

द्वितीय स्थान -

जब भी कागज पर लिखूं , मैं माता का नाम ।
सब कुछ सुन्दर लग रहा, पूर्ण हुए सब धाम ।।
           -आर्या

तृतीय स्थान-

जो मानव सब काम में, अनुशासन अपनाय ।
सबको पीछे छोड़ कर, आगे बढ़ता जाय ।
       -तनु प्रिया

इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजीव रंजन ने सफल छात्रों के साथ सभी प्रतिभागियों को साधुवाद देते हुए कहा है कि छंद की समझ व्यक्ति में भाषा और व्यवहार का संस्कार सृजित करती है। यह प्रशंसनीय है कि हमारे छात्रों के छंदों में भावों की तीव्रता उत्कर्ष को प्राप्त कर रही है। विद्यालय के उपप्राचार्य व शैक्षणिक प्रमुख सुनील कुमार ने सभी प्रतिभागियों के प्रति शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि छंद का यह सबसे बड़ा गुण है कि पंक्तियाँ सहज ही स्मरण हो आती हैं। हमारे छात्र जिस प्रकार अच्छे अच्छे छंदों का सृजन कर रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। पखवारा के समन्वयक व भाषा शिक्षक डॉ. सुधांशु कुमार ने बताया कि रविवार को आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच छंद लेखन प्रतिगयोगिता होगी। आठ बजे विषय दिया जाएगा जिस पर छंद लिखकर नौ बजे तक प्रेषित करना होगा।