कोरोना से लड़ने में विफल सरकार लिट्टी-चोखा खाने में थी व्यस्त : राजीव सातव

  • Post By Admin on Sep 18 2020
कोरोना से लड़ने में विफल सरकार लिट्टी-चोखा खाने में थी व्यस्त : राजीव सातव

नई दिल्ली : कोविड-19 महामारी से जहां पूरी दुनिया जूझ रही है, वहीं देश में सरकार और विपक्ष कोरोना को लेकर तैयारियों एवं व्यवस्थाओं पर आमने-सामने है। इस बीच शुक्रवार को राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 12 फरवरी को  कोरोना से लड़ने का प्लान बनाने की बात कही थी तो सरकार लिट्टी-चोखा खाने में व्यस्त थी। इतना ही नहीं जब देश का चुनाव समाप्त हो जाता है तो हम विदेश के चुनावों पर ध्यान लगा लेते हैं। उस वक्त देश की अर्थव्यवस्था और कोरोना महामारी के बजाय हमारा अप्रोच ‘नमस्ते ट्रंप’ हो जाता है। ऐसे में भला किस प्रकार से लोगों के लिए सरकार उचित सुविधाओं का प्रबंधन कर पाती।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकारी वादों के मुताबिक लोगों को 15 लाख रुपये तो नहीं मिले लेकिन 50 लाख कोरोना केस जरूर सामने आ गए। बिना तैयारी के आपने लॉकडाउन किया। आप 21 दिन में कोरोना मुक्त तो कर नहीं पाए, लेकिन यह देश रोजगार मुक्त जरूर हो गया। सातव ने कहा कि अब सरकार करोना योद्धाओं के वेतन में कटौती भी करने जा रही है। उन्होंने पूछा कि एक तरफ उस वॉरियर्स के लिए आप ताली-थाली बजवाते हैं, दूसरी ओर कोरोना योद्धाओं के वेतन में कटौती कर रहे है... आखिर सरकार किस सोच के साथ काम कर रही है यह समझ से परे है।

सरकार के नोटबन्दी, जीएसटी और लॉकडाउन जैसे फैसलों पर तंज कसते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार के हर निर्णय से लोगों को सिर्फ परेशानी ही हुई। इस दौरान शायरी करते हुए राजीव सातव ने कहा- “ना पूछ शिकायतें कितनी है तुझसे... सिर्फ यह बता कोई और सितम तो बाकी नहीं।” क्योंकि आज भी जब रात को 8 बजता है तो ऐसा लगता है कि कुछ और नया आने वाला है।

राजीव सातव ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के लिए अभी नए ऑफिस की क्या जरूरत है? अभी हमारी संसद 100 साल भी पुरानी नहीं हुई। ऐसे में जब देश की अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है और तमाम समस्याओं के बीच लोगों को आर्थिक मदद की जरूरत है तो करोड़ रुपये बिल्डिंग निर्माण में लगाने से बेहतर उससे लोगों को जीवन स्तर को सुधाने की कोशिश होनी चाहिए।