वातावरण शुद्ध रखने के लिए कॉलोनियों में विकसित किए जा रहे तितली पार्क

  • Post By Admin on Jun 05 2020
वातावरण शुद्ध रखने के लिए कॉलोनियों में विकसित किए जा रहे तितली पार्क

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लिए अच्छी खबर है। पर्यावरण की शुद्धता का पैमाना माने जाने वाली खूबसूरत तितलियों का संसार अब घरों में भी बसाया जाने लगा है। दिल्ली के रिज क्षेत्रों, कॉलोनियों के साथ लोग अब अपने घरों की बगियां में भी तितलियों का संसार बसाने लगे हैं। इसके लिए वे तितलियों की पंसद के पेड़ पौधे लगा रहे हैं। 

असोला भाटी वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी, बीएनएचएस के प्रबंधक सोहेल मदान ने बताया कि तितलियों को बचाने और संरक्षण देने के लिए पार्क में छोटे-छोटे वाइल्ड पैच छोड़ने होंगे। तितलियों की मौजूदगी इकोसिस्टम के लिए काफी जरूरी है। यह फसलों का परागण करती हैं। उन्होंने बताया कि अगर घरों के अंदर भी वातावरण शुद्ध रखना है तो घरों में भी तितली पार्क विकसित करने की आवश्यकता है। इस योजना के तहत नौ घरों में अब तक तितली पार्क विकसित किए जा चुके हैं। इनमें आश्रम, साकेत, पश्चिम विहार, कड़कड़डूमा, लक्ष्मी नगर, फरीदाबाद, नोएडा सेक्टर सात, और ग्रेटर नोएडा के घर शामिल हैं। इसके साथ कॉलोनियों में भी तितली पार्क विकसित करने के काम किया जा रहा है।

तितलियां होती है शुद्धता नापने का पैमाना

तितलियां फसलों में परागण करने के साथ पर्यावरण की शुद्धता भी बताती हैं। जहां तितलियां होती हैं वहां का वातावरण शुद्ध होता है। प्रदूषण वाले स्थान पर तितलियां नहीं होती हैं। इसलिए इसे पर्यावरण की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। मनोरम दिखने वाली तितलियों का महत्व इसकी सुंदरता और बढ़ा देती है। इसलिए इसे दोबारा शहरों में बसाने के लिए इनके मन पसंद पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। तितलियों को कढ़ी पत्ता, नींबू, पाम, हरश्रृंगार, मालती, गेंदा, अमलताश, बेल, नीम, जामुन, लौकी, तोरी जैसे पौधें काफी पसंद हैं। तितलियां इन पौधों पर अंडे देती है।

दिल्ली में 75 प्रजातियों की तितलियां

करीब दो साल पहले तितलियों के किस्मों की गिनती से पता चला कि दिल्ली में 75 प्रजातियों की तितलियां पाई जाती हैं। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) ने असोला भाटी के साथ शहर के अन्य बायावर्सिटी पार्क में तितलियों के प्रजातियों की गिनती करवाई थी। इन 75 प्रजातियों में तकरीबन 85 प्रतिशत प्रजातियां यानी 63 प्रजातियां पार्कों में मिलीं। इन गिनती में सबसे अधिक प्लेन टाइगर, कॉमन कैस्टर, कॉमन ग्लास यलो, कॉमन जे, डेनेड एगफ्लाई, लैमन मिगरेंट दिखाई दीं। कुछ दुर्लभ प्रजातियां भी इस दौरान देखी गईं। इनमें इंडियन रेड फ्लैश, बुश ब्राउन, क्रिमसन टिप, रेड आई, अफ्रीकन बाबुल ब्लू और कॉमन शॉट सिल्वरलाइन के साथ दिल्ली में दिखाई न देने वाली तितलियां कॉमन लाइन ब्लू, डिंगी स्विफ्ट, बलका पेरट और स्पॉटेड पैरट भी दिखाई देने लगी है।

ब्लू मॉरमॉन महाराष्ट्र की राजकीय तितली

महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य है जिसके पास राजकीय तितली हैं। पांच साल पहले उस वक्त के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सहयाद्रि की पहाड़ियों में मिलने वाली ब्लू मॉरमॉन प्रजाति की तितली को राजकीय तितली घोषित किया गया है।